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शराब बनाने, बेचने व पीने पर सख्त पाबंदी के बावजूद बिहार में लगातार अवैध या जहरीली शराब पीने से मौतों के मामले सामने आ रहे हैं। इसे देखते लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। पासवान ने इस बारे में राज्यपाल फागू चौहान को पत्र लिखा है।

पासवान ने मीडिया को बताया कि उनकी पार्टी ने राज्यपाल चौहान को पत्र लिखकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में अवैध शराब से हो रही मौतों को रोकने के लिए यह जरूरी है।  राज्य के सारण जिले में इसी सप्ताह कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में कठोर शराबबंदी कानून के बावजूद अवैध या विषाक्त शराब से मौतें हैरान करने वाली हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई से चर्चा में चिराग पासवान ने कहा कि हमने बिहार में अवैध शराब से और मौतें रोकने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे केंद्र से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करें। चिराग पासवान बिहार के सीएम नीतीश कुमार के कड़े आलोचक हैं, लेकिन बीते दिनों उन्होंने राज्य में शराबबंदी का समर्थन किया था।

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पूर्व सीएम मांझी ने भी उठाए शराबबंदी पर सवाल 
उधर, राज्य में सत्तारूढ़ राजग के अन्य दल शराबबंदी पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। बिहार के पूर्व सीएम व हम पार्टी के अध्यक्ष जीतनराम मांझी भी नशाबंदी पर सवाल उठा चुके हैं। मांझी ने भी सीएम से इस पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। मांझी ने बीते दिनों सीएम नीतीश कुमार से कहा था कि शराबबंदी कानून के तहत सिर्फ गरीब लोगों को ही पकड़ा जा रहा है। जो लोग अवैध शराब के कारोबार में लिप्त हैं, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। पकड़े गए लोगों में से 70 फीसदी से ज्यादा गरीब लोग हैं।

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2021 में हुईं 66 मौतें
नीतीश सरकार ने बिहार में अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू की है, लेकिन इसके बाद से लगातार अवैध शराब से मौतों की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसे लेकर विपक्ष शराबबंदी की कड़ी आलोचना कर रहा है। शराबबंदी के बावजूद 2021 में 13 घटनाओं में जहरीली शराब से 66 लोगों की मौत हुई थी। मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण और नवादा जिलों में जहरीली शराब से ज्यादा मौतें हुई हैं।