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नई दिल्ली: 

Covid-19 Pandemic: दिसंबर महीने में देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के यूके स्ट्रेन (UK Strain) की एंट्री हुई थी. वायरस के इस नए स्वरूप के बारे में यह जानकारी है कि फैलता बहुत तेजी से है लेकिन बीमारी की गंभीरता को नहीं बढ़ा रहा था जिससे कि मौत की संख्या में बढ़ोतरी नहीं देखी गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने मंगलवार को जानकारी दी कि देश में अब तक कुल 187 यूके ट्रेन के मामले सामने आ चुके हैं. लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने साप्ताहिक ब्रीफिंग में यह जानकारी भी दी कि देश के अंदर दो और देशों के स्ट्रेन भी दाखिल हो चुके हैं. दक्षिण अफ्रीका से देश लौटने वाले 4 लोगों में स्ट्रेन की पुष्टि हुई है जबकि एक व्यक्त‍ि में ब्राजील का स्ट्रेन पाया गया है. दक्षिण अफ्रीका का वेरिएंट, अमेरिका सहित दुनिया के 41 देशों में फैला है. यूके का कोविड-19 वेरिएंट दुनिया के 82 देशों में फैल चुका है जबकि ब्राजील का स्‍ट्रेन 9 देशों में फैला है.

#साउथ अफ्रीका स्ट्रेन 
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि देश के अंदर जनवरी 2021 में साउथ अफ्रीका से लौटने वाले 4 यात्रियों में कोरोना वायरस के साउथ अफ्रीका स्ट्रेन की पुष्टि हुई है. इन सभी को आइसोलेट कर दिया गया है जबकि इनके संपर्क में आए लोगों का टेस्ट कराकर क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है. साउथ अफ्रीका स्ट्रेन के बारे में बताया गया है कि यह पहली बार दिसंबर के मध्य में रिपोर्ट हुआ था. साउथ अफ्रीका में ज्यादातर मामले वायरस के इसी स्वरूप के पाए गए हैं. वायरस का यह स्वरूप अभी तक 44 देशों में फैल चुका है.

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#ब्राज़ील स्ट्रेन 
कोरोना वायरस का एक और नया स्वरूप जो ब्राजील से आया है जिसको हम ब्राजील स्ट्रेन के नाम से जान रहे हैं. उसकी भी भारत में एंट्री हो गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि फरवरी के पहले हफ्ते में ब्राजील से लौटने वाले एक शख्स में ब्राजील स्ट्रेन की पुष्टि हुई है. संक्रमित पाए गए यात्री को आइसोलेट कर दिया गया है और उसके संपर्क में आए सभी लोगों का टेस्ट करा कर क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है. मंत्रालय ने बताया कि ब्राजील में संक्रमण के मामले बढ़ने का यह एक बड़ा कारण है. ये स्ट्रेन अब तक 15 देशों में फैल चुका है.

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के यूके स्ट्रेन के बारे में बताया था कि यह सुपर स्प्रेडर है यानी यह बहुत तेजी से फैलता है. हालांकि यह बीमारी की गंभीरता को नहीं बढ़ाता जिससे मौत की संख्या में बढ़ोतरी नहीं होती. इन्हीं पैमानों पर साउथ अफ्रीका और ब्राजील के ट्रेन के बारे में क्या कहेंगे?

ICMR ने इसको इसको सुपर स्प्रेडर नहीं बताया है. ICMR के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने एनडीटीवी के इस सवाल पर कहा कि ‘ये स्ट्रेन वायरस को क्षमता देता है कि ये फेफड़ों में आसानी से घुस जाए. यह ब्राजीलियन और साउथ अफ्रीका के वेरिएंट में देखा गया है.’

दिसंबर महीने में यूके स्ट्रेन के चलते भारत ने यूके से आने वाली सभी फ्लाइट रद्द कर दी थी. अब जब साउथ अफ्रीका और ब्राजील के स्ट्रेन या स्वरूप सामने आए हैं तो क्या भारत साउथ अफ्रीका और ब्राजील से भी फ्लाइट उसी तरह से रोक देगा? स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जिस तरह की टेस्टिंग स्ट्रेटेजी यूके स्ट्रेन को पकड़ने के लिए बनाई गई थी वैसे ही रणनीति साउथ अफ्रीका और ब्राजील के स्ट्रेन को पकड़ने के लिए बनाई जा सकती है. हालांकि इन देशों से फ्लाइट रोकने जैसा फिलहाल कोई इरादा नहीं दिखता.

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स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा, ‘यूके वेरिएंट के अनुभव ने हमें यह सिखाया कि जितने भी लोग यूके से आए उनका हमने 100 फ़ीसदी आरटी पीसीआर टेस्ट करवाया और अभी भी करवा रहे हैं और उसमें जो संक्रमित पाए गए उनकी जिनोम सीक्वेंसिंग करवाई गई तो मुझे लगता है कि यह जो रणनीति है इसका काफी असर हुआ और इसके अच्छे परिणाम निकले. संभवतः इसी प्रकार की रणनीति हम साउथ अफ्रीका और ब्राजील की फ्लाइट के लिए अपनाएंगे. यहां केवल एक अंतर यह है कि जैसे यूके से भारत सीधी फ्लाइट आती हैं उस तरह से डायरेक्ट फ्लाइट साउथ अफ्रीका या ब्राजील से हमारे देश में नहीं आती हैं. अधिकांश ट्रैफिक अन्य सेक्टर से रूट होती है. उदाहरण के तौर पर गल्फ सेक्टर. तो किस प्रकार के कदम उठाए जाने हैं इसके लिए भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संपर्क में है और हम शीघ्र आपसे जानकारी साझा करेंगे.’