English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-05-12 085550

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर के सर्वे के दौरान वीडियोग्राफी करने वाले विभाष दूबे ने कई दावे किए हैं। अब उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद का नाम भी इस ओर इशारा करता है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई होगी क्योंकि किसी मस्जिद का नाम ज्ञानवापी नहीं हो सकता।

 

वहीं इतिहासकार प्रोफेसर चतुर्वेदी कहते हैं कि मस्जिद निर्माण का कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है और मस्जिद का नाम ज्ञानवापी हो भी नहीं सकता। ऐसा लगता है कि ज्ञानवापी कोई ज्ञान की पाठशाला रही होगी। पाठशाला के साथ मंदिर भी रहा होगा जो प्राचीन गुरुकुल परंपराओं में हमेशा हुआ करता था। उस मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनी तो उसका नाम ज्ञानवापी पड़ गया। ऐसा माना जा सकता है।

Also read:  सिंधिया की हार पर मध्य प्रदेश में मच गई रार, शिवराज के मंत्री ने कमलनाथ पर लगाया आरोप

करीब 31 साल से कोर्ट में चल रहा है केस

1991 में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।याचिका में कहा गया था कि 1669 में मुगल शासक औरंगजेब ने यहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बना दी। इतने साल बाद मार्च में कोर्ट ने सर्वे करने का फैसला दिया गया। काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरोहितों के वंशजों ने कोर्ट में याचिका दायर की है। उनके वकील विजय शंकर रस्तोत्री ने आजतक को सबूत के तौर पर नक्शा भी दिखाया।

ASI से पूछा गया कि क्या मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाया गया ? अगर मंदिर था तो किसका था ? कितने साल पुराना है ? क्या पहले भी कोई यहां ढांचा था ? 2 महीने में सर्वे करने का आदेश दिया, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। ये मामला अभी लंबित है।

Also read:  कर्नाटक सरकार का दावा: लोगों की जिंदगी और आजीविका के मद्देनजर लगाए जाएंगे कोरोना प्रतिबंध

हालिया सर्वे एक अन्य मामले में कराया गया

18 अगस्त 2021 में वाराणसी की एक अदालत में 5 महिलाओं ने याचिका दायर कर कहा था कि इस मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी की मूर्ति है, यहां मंदिर बना है। हम उनकी रोज पूजा करना चाहते हैं, इसका अधिकार दिया जाए।  इसके बाद कोर्ट ने सर्वे कराने का आदेश दिया था।

लेकिन डेढ़ दिन बाद ही रोकना पड़ा सर्वे

6 मई से ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे शुरू हुआ, लेकिन डेढ़ दिन बाद ही मुस्लिम पक्ष ने सर्वे के लिए अदालत की तरफ से नियुक्त किए गए कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए। खूब हंगामा हुआ और सर्वे को रोकना पड़ा। उनके खिलाफ 7 मई को प्रतिवादी अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी कोर्ट पहुंच गई और उन्हें बदलने की मांग कर दी।

Also read:  हेट स्पीच मामले पर भड़का सुुप्रीम कोर्ट, कहा-सरकार बताएं कि अब तक क्या कार्रवाई की

पूरी ईमानदारी से किया काम: एडवोकेट कमिश्नर

सर्वे के लिए कोर्ट की ओर से नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा ने आजतक से बताया कि उन्होंने पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और निष्ठा से अपना काम किया है। आपत्तियां आती रहती हैं जिसका निस्तारण करना कोर्ट का काम है। मैंने सारा आदेश सही से मना है। ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जिससे आदेश का उल्लंघन हो। आदेश जो भी होगा हम उसका पालन करेंगे।