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दिल्ली हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जेल में बंद आप के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और दो अन्य पर कई सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की पीठ ने मंगलवार (21 मार्च) को दोनों पक्षों की दलीलों के निष्कर्ष के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बहस करते हुए कहा कि जैन और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग स्पष्ट है।

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अपनी जमानत याचिका में जैन ने कहा कि वह 7 बार ईडी के सामने पेश हुए। उन्होंने जांच में सहयोग किया और भाग लिया। उसे 2022 में 5 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 17 नवंबर 2022 को सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जैन को 30 मई, 2022 को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह इस मामले में न्यायिक हिरासत में है।

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दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी जमानत पर जैन ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश और ईडी ने आवास प्रविष्टियों के आधार पर अपराध की आय की पहचान करके पीएमएलए को गंभीर रूप से गलत तरीके से पढ़ा और गलत तरीके से लागू किया। यह आवास प्रविष्टियां अपने आप में पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराध का कारण नहीं बन सकती हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी सत्येंद्र कुमार जैन ने जानबूझकर गलत तरीके से कमाए गए धन के स्रोत का पता लगाने के लिए ऐसी गतिविधि की थी और तदनुसार, कोलकाता स्थित एंट्री ऑपरेटरों के माध्यम से अपराध की आय को स्तरित किया गया था। जिस तरह से इसके स्रोत को समझना मुश्किल था।

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