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भारत में बारिश कभी खुशियां लेकर आती है तो कभी गमों के पहाड़ खड़े कर देती है. जी हां, अच्छे मानसून के बिना जहां देश की खेती-किसानी का बड़ा भाग सूखे की मार झेलता है तो वहीं देश के कई राज्यों में भयंकर बाढ़-बारिश से के चलते जान-माल के नुकसान के साथ-साथ करोड़ों रूपयों की बर्बादी भी हर साल देखने को मिलती है।

भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि यहां की रीड़ कही जाती है लेकिन हर साल बारिश के मौसम में मानसून को लेकर उम्मीद की जाती है। लेकिन उम्मीद के बादल जब ज्यादा ही तेज़ भयंकर आकार में आ जाते है तो ये मानसून बाढ़ के रूप में सबकुछ बहा देता है। जिससे देश की एक बड़ी आबादी को अपना सबकुछ गंवाना पड़ता है। आंकड़े बताते है कि साल 2018 से लेकर 2020 तक के दौरान इन तीन सालों में देश को करीब 59 हजार करोड़ का आर्थिक नुकसान बाढ़ के कारण ही हुआ है करीब 11.04 फीसद लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

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2018 में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

आपको बता दें कि लोकसभा में जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 से 2020 के दौरान के इन तीन सालों में 59 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इन सभी नुकसान में खेती-किसानी, पब्लिक प्रोपर्टी, पर्सनल प्रोपर्टी आदि को मिलाकर आंका गया है। बात सबसे ज्यादा नुकसान की करें तो साल 2018 में 21.850 करोड़ रूपये का नुकसान केवल बाढ़ से ही हुआ था. बात अगर साल 2019 की करें तो इसमें काफी इज़ाफा हुआ था लेकिन अच्छी बात ये है कि इस साल कुल नुकसान 15,864 करोड़ का हुआ जो कि बीते सालों की तुलना में काफी कम था।

देशभर में सिर्फ कर्नाटक में ही एक चौथाई नुकसान

बात अगर सबसे ज्यादा नुकसान की करें तो ये जानना बहुत जरूरी है कि भारत में बाढ़ की वजह से सबसे ज्यादा आर्थिक तौर पर नुकसान अग किसी राज्या को हुआ है तो वो है कर्नाटक. जी हैं, बाढ़ की हुई तबाही से देशभर में हुए आर्थिक नुकसान का एक चौथाई केवल कर्नाटक को हुआ है। कर्नाटक में 2018 से 2020 के दौरान फसलों, घरों सार्वजनिक सुविधाओं को पहुंचे नुकसान की कुल कीमत को अगर अंकों में जोड़ा जाए तो ये राशि 14,450 करोड़ रुपये है। जो कि, दूसरे राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है। कर्नाटक के बाद दूसरे नंबर पर राजस्थान है जहां पर इन तीन सालों के दौरान 9,043 करोड़ रूपये। अस 8.04 करोड़ रूपये आंध्रप्रदेश को 5.3 हजार करोड़ तमिलनाडु को 3.5 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था।

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11.04 करोड़ लोग तीन साल में बाढ़ से प्रभावित

आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 जहां में 3.74 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे 77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ था। तो वहीं, साल 2019 भी लोगों के जनजीवन में भारी तबाही लेकर आया। 2019 में ये 20 फीसद बढ़कर 4.63 करोड़ हो गई, लेकिन इस दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कम होकर 44.94 लाख हेक्टयर पर पहुंच गया। कोराना काल की बात करें तो साल 2020 में बाढ़ की मार झेलने वालो लोगों की संख्या 2.66 करोड़ थी।

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तीन सालों में 6 हज़ार लोगों की मौत

बात अगर मौत के आंकड़ों की करें तो बाढ़ के कारण देशभर में 6000 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। साल 2018 में बाढ़ ने एक बड़े हिस्से को काफी प्रभावित किया था, उस साल मरने वालों की संख्या 1,839 थी। वहीं, साल 2019 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कम होने पर मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 2,754 हो गई। साल 2020 में मृतकों की संख्या 1,365 रही थी।