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नई दिल्ली: 

सीमा पर शत्रुता और गतिरोध के बीच चीन ने पिछले साल भारत में बिजली सुविधाओं को भी निशाना बनाया है. एक रिपोर्ट में इसकी आशंका जताई गई है और कहा गया है कि पिछले साल अक्टूबर में मुंबई में आया बिजली संकट इसी का उदाहरण हो सकता है. मुंबई में अक्टूबर में कोविड महामारी के बीच बड़े पैमाने पर बिजली संकट आया था जिसकी वजह से ट्रेनें रास्ते में रुक गई थीं और घंटों तक अस्पताल अंधेरे में रहे थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि हो सकता है कि इन गतिविधियों को चीन से जुड़े खतरनाक समूह ने अंजाम दिया हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बारे में सरकार को बता दिया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन से जुड़े खतरनाक गतिविधि करने वाले समूह RedEcho ने भारतीय बिजली क्षेत्र को लक्षित किया था. उसके गतिविधियों की पहचान बड़े पैमाने पर स्वचालित नेटवर्क ट्रैफ़िक एनालिटिक्स और विशेषज्ञ विश्लेषण के संयोजन के माध्यम से की गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई पावर कट के लिंक इंडियन लोड डिस्पैच सेंटर्स के समन्वित लक्ष्यीकरण का सुझाव देते हुए अतिरिक्त सबूत प्रदान करते हैं.

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स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि लद्दाख तनाव, जो जून में गलवान घाटी में संघर्ष के साथ बढ़ गया था और जिसमें देश के लिए 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी, के समय चीनी मैलवेयर उस सिस्टम में फ्लो कर रहे थे जो पूरे भारत में बिजली आपूर्ति का प्रबंधन करता है.

चीनी मैलवेयर का फ्लो एक यूएस-आधारित कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर द्वारा जोड़ा गया था. ये कंपनी सरकारी तंत्रों द्वारा इंटरनेट के उपयोग का अध्ययन करती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह पाया गया कि अधिकांश मैलवेयर कभी एक्टिव नहीं हो सके क्योंकि रिकॉर्डेड फ्यूचर भारत की बिजली प्रणालियों के अंदर नहीं पहुंच सकता था, इसलिए यह उस कोड के विवरण की जांच नहीं कर सका, जिसे देश भर में बिजली वितरण प्रणालियों में रखा गया था.

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रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 की शुरुआत से ही रिकॉर्डेड फ्यूचर की इन्सटैक ग्रुप ने चीन प्रायोजित समूहों द्वारा भारतीय संगठनों के खिलाफ संदिग्ध लक्षित घुसपैठ की गतिविधियों में बड़ी वृद्धि देखी है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “साल 2020 के मध्य से रिकॉर्डेड फ्यूचर के मिडपॉइंट संग्रह ने AXIOMATICASYMPTOTE के रूप में ट्रैक किए गए बुनियादी ढांचे के उपयोग में तेजी से वृद्धि देखी है, जिसमें शैडोपैड कमांड और सर्वर कंट्रोल को शामिल किया गया है, और भारत के बिजली क्षेत्र के एक बड़े समूह को लक्षित करता है.”

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भारत के खिलाफ इस लक्षित साजिश में पांच में से चार क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्रों समेत कुल 10 विशिष्ट भारतीय बिजली क्षेत्र संगठन, जो देश में बिजली की आपूर्ति और मांग को नियंत्रित करने के लिए पावर ग्रिड का संचालन करने के लिए जिम्मेदार हैं, के खिलाफ इस चीनी अभियान की पहचान की गई है. पहचानकिए गए अन्य टारगेट में दो भारतीय बंदरगाह भी शामिल हैं.”

रिकॉर्डेड फ्यूचर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “इस अभियान में भारतीय संगठनों का एक स्पष्ट और सुसंगत पैटर्न था, जो कि नेटवर्क ट्रैफ़िक से लेकर प्रतिकूल अवसंरचना तक की व्यवहारिक रूपरेखा के माध्यम से लक्षित था. बिजली उत्पादन और पारेषण क्षेत्र में 12 भारतीय संगठनों से जुड़े कुल 21 आईपी एड्रेस लक्षित किए गए थे.”