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नई दिल्ली: 

हाथरस गैंगरेप मामले (Hathras Gang Rape Case) की जांच SIT कर रही है. इस केस में मुख्य आरोपी सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में योगी सरकार पर पर्दा डालने का आरोप लग रहा है. इस कड़ी में राज्य सरकार ने एक के बाद एक कई गलतियां कीं. पहली गलती, आधी रात में परिवार को घर में कैद कर पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया. इसके बाद प्रशासन ने गांव में मीडिया की एंट्री पर पाबंदी लगा दी, जिसको लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे. अब से कुछ देर पहले मीडिया को फिर से गांव जाने की अनुमति दे दी गई है. भीम आर्मी (Bhim Army) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) ने NDTV से खास बातचीत में योगी सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

चंद्रशेखर आजाद से जब हाथरस गैंगरेप मामले में प्रशासन द्वारा छिपाने और पीड़ित परिवार को ही प्रताड़ित किए जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘छिपाने का प्रयास तो किया ही जा रहा है. अगर छिपाने का प्रयास नहीं किया तो चोरों की तरह बेटी के शव को, जिसको लेकर देश में आक्रोश था, ऐसे जलाया नहीं जाता. उत्तर प्रदेश सरकार किसी भी तरह से अपराधी को बचाने में लगी है. कुछ अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड किए गए हैं, उनसे कुछ नहीं होने वाला क्योंकि वो वही कर रहे थे जो CM उनको कह रहे थे.’

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उन्होंने आगे कहा, ‘जिस तरह से पीड़ित परिवार को बंधक बनाकर रखा गया, परिवार से मीडिया को नहीं मिलने दिया गया, जैसे उत्तर प्रदेश में घुसते ही मूल अधिकार खत्म हो जाते हैं, जिस तरह से एडीजी का बयान आता है कि रेप नहीं हुआ है, जिस तरह से नार्को टेस्ट की बात हो रही है, तो मुझे लगता है कि कहीं न कहीं ये उसी ट्रैक पर केस आ रहा है, जैसे उन्नाव वाले केस में हुआ था कि पीड़िता के चाचा को ही बंद कर दिया जाता है. बीजेपी नेता के मामले में हुआ था कि लड़की पर ही मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था. इस मामले में भी यही सब कुछ हो रहा है. पीड़ित परिवार पर आरोप लगाकर सरकार ये दिखाना चाहती है कि उत्तर प्रदेश में अपराध नहीं हो रहा, लोग राजनीति कर रहे हैं.’

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चंद्रशेखर आजाद ने आगे कहा, ‘लोकतंत्र तो है, संविधान भी है लेकिन तानाशाही भी है. यूपी सरकार कह रही है कि धारा 144 लगी है, वहीं पड़ोस में आरोपियों के पक्ष में पंचायत हो जाती है. भेदभाव तो हो रहा है. अब ये नार्को टेस्ट की जो मांग है, ये भी तो आरोपी पक्ष की है, जो मुख्यमंत्री ने पूरी कर दी. पीड़ितों की मांग तो नहीं पूरी कर पा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में एक जाति का घमंड बना हुआ है कि मुख्यमंत्री हमारी जाति का है कि हमारा कुछ नहीं हो सकता है और इन दलितों को हम देख लेंगे. वो लोग दलितों पर अत्याचार कर रहे हैं और CM उनको बचा रहे हैं. मैंने दलित समाज से कल भी मांग की थी कि वो लोग सफाई का काम बंद कर दें क्योंकि हम इनकी गंदगी तो साफ कर रहे हैं लेकिन इनकी मानसिक गंदगी जो सरकार के दिमाग में बैठी हुई है, वो साफ नहीं हो रही है. ऐसे मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. प्रधानमंत्री अपनी चुप्पी तोड़ें.’

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