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पंजाब में आखिरकार त्रिकोणीय गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है। अब तक शिरोमणि अकाली दल के साथ छोटे भाई की भूमिका में रहने वाले इस नए गठबंधन में भाजपा बड़े भाई की भूमिका में दिखेगी।

गठबंधन में भाजपा, पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) और शिअद संयुक्त के बीच बनी सहमति के बाद भाजपा को 60, पीएलसी को 40 और शिअद संयुक्त को 12 सीटें आवंटित हुई हैं। पांच विधानसभा सीटों को अभी सुरक्षित रखा गया है। पहली सूची जारी होने के बाद इन पर फैसला लिया जाएगा।

कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का गठबंधन कर चुके हैं। इस गठबंधन में शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) भी शामिल है। तीनों के मिलने के बाद पंजाब की सियासत में काफी बदलाव आया है। गठबंधन में शामिल तीनों दल पंजाब की सत्ता हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।

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कांग्रेस, शिअद और आप द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद त्रिकोणीय गठबंधन पर प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर दबाव बढ़ गया था। जिसके बाद तीनों दलों की ओर से सीट बंटवारे को लेकर पूरी तरह से सहमति बन गई है। इसके बाद भाजपा के संसदीय बोर्ड ने अब तक आए 4000 से अधिक आवेदनों पर मंथन भी शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सीट बंटवारा होने के बाद अब तीनों दल इसी हफ्ते प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर देंगे। दिल्ली में हुई भाजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक में पार्टी प्रत्याशियों की पहली सूची पर अंतिम मुहर लग चुकी है। इसके बाद यह संभावना जताई जा रही है कि गुरुवार को भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर देगी।लोक इंसाफ पार्टी चलाने वाले बैंस ब्रदर्स भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सुरक्षित रखी गईं पांच सीटें बैंस ब्रदर्स को आवंटित की जाएंगी। जल्द ही इसको लेकर गठबंधन के सभी साथियों की ओर से सूचना जारी कर दी जाएगी।

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त्रिकोणीय गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर 6 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसमें भाजपा की ओर से पंजाब भाजपा के महासचिव डा. दिनेश शर्मा, पीएलसी की ओर से कैप्टन के बेटे रणइंदर और शिअद संयुक्त की ओर से ढींडसा के करीबी नेता शामिल हुए थे। कमेटी ने सीट बंटवारे को लेकर 10 से ज्यादा बैठकें की।

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24 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद भाजपा ने फिर से शिअद को गठबंधन का न्योता दिया था। भाजपा के नेताओं ने कहा था कि अब तक हमेशा शिअद बड़े भाई की भूमिका में रहती थी, लेकिन अब नए गठबंधन के तहत शिअद को छोटे भाई की भूमिका में आना होगा। भाजपा के इस न्योते को शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सिरे से खारिज कर दिया था।