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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने माल एवं सेवा कर (GST) को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

 

राहुल गांधी ने एक बार फिर GST को गब्बर सिंह टैक्स बताया है। साथ ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी का कम दर वाला एक स्लैब बनाने की मांग भी की है। राहुल गांधी ने कहा कि जीएसटी का एक स्लैब और कम दर होने से गरीबों एवं मध्य वर्ग पर बोझ कम करने में मदद मिलेगी। इसको लेकर राहुल गांधी ने मंगलवार को एक ट्वीट किया है। असल में 28 जून को जीएसटी परिषद की एक बैठक आयोजित हुई थी। जिसमें पैकेट बंद मछली, दही, पनीर, शहद, सूखे फलियां, सूखे मखाना, गेहूं और अन्य अनाज, गेहूं या मेसलिन का आटा, गुड़, मुरमुरा (मुरी), सभी सामान और जैविक खाद और कॉयर पिथ कम्पोस्ट पर अब 5 फीसदी जीएसटी लगाने की सिफारिश की थी। जिस पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने मंगलवार को यह ट्वीट किया है।

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को अपने ट्वीट में कहा है कि स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी 18 प्रतिशत, अस्पताल में कमरे पर जीएसटी 18 प्रतिशत है और हीरे पर जीएसटी 1.5 प्रतिशत है। गब्बर सिंह टैक्स इस बात का दुखद स्मरण कराता है कि प्रधानमंत्री किसका ख्याल रखते हैं। साथ ही ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा है कि एक स्लैब और कम दर वाली जीएसटी से गरीबों और मध्य वर्ग पर बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

जीएसटी का दायरा बढ़ाए जाने के बाद से कांग्रेस केंद्र सरकार पर है हमलावर

जीएसटी की उगाही पर सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था जीएसटी परिषद की28 जून को एक बैठक हुई थी। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में सभी राज्यों के मंत्री शामिल हुए थे। इस बैठक में पहले से पैक और लेबल वाला मांस (जमे हुए को छोड़कर), मछली, दही, पनीर, शहद, सूखे फलियां, सूखे मखाना, गेहूं और अन्य अनाज, गेहूं या मेसलिन का आटा, गुड़, मुरमुरा (मुरी), सभी सामान और जैविक खाद और कॉयर पिथ कम्पोस्ट पर अब 5 फीसदी जीएसटी लगाने की फैसला किया था। कुल मिलाकर बैठक में जीएसटी का दायरा बढ़ाया गया था. इस फैसले के बाद से कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर है।

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इस मामले को लेकर दिल्ली महिला कांग्रेस अध्यक्ष अमृता धवन ने सोमवार को कहा था कि केंद्र सरकार ने आम आदमी की जेब में छेद करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा था कि महामारी के कारण हर घर की आर्थिक स्थिति परेशान थी, लोगों के पास नौकरी नहीं है। ऐसे में सरकार को लोगों को राहत देनी चाहिए, लेकिन वे इसके बजाय खाद्यान्न पर जीएसटी लगा रहे हैं।

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