English മലയാളം

Blog

नई दिल्ली: 

ई-टेंडर घोटाले (E-tendering scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED), मध्य प्रदेश में 16 जगहों पर छापेमारी कर रही है. यह पूरा घोटाला 3000 करोड़ रुपये का बताया गया है.वर्ष 2018 में शिवराज सिंह चौहान सरकार के शासन के दौरान 9 ई-टेंडर पर सवाल खड़े किए गए थे,अधिकारियों की मिलीभगत से सिस्टम में छेड़छाड कर ये टेंडर उनके करीबियों को दिए गए हैं. इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश के आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ (EOW) ने अप्रैल 2019 में केस दर्ज किया था.

Also read:  लखनऊ में महिला ने अखिलेश यादव की कार के सामने की आत्महत्या की कोशिश, खुद पर छिड़क लिया कैरोसीन

जांच में अब तक किसी भी तरह का राजनैतिक प्रभाव सामने नहीं आया था, बल्कि पता चला था कि अलग-अलग विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ कंपनियों को निजी फायदा पाने के लिए गलत तरीके से टेंडर दिए गए हैं. मामले में अभी तक कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं. इसी मामले में मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत 16 लोकेशन्स पर ED की रेड चल रही हैं.ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रनिक डेवलपमेंट कर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएईडीसी) के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के संचालन का काम सॉफ्टवेयर कंपनियों के पास था. विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ई-टेंडरिंग घोटाले ने तूल पकड़ा था. तब यह बात सामने आई थी कि सॉफ्टवेयर कंपनियों के सहारे टेंडर हासिल करने वाली निर्माण कंपनियों ने मनमाफिक दरें भरकर अनधिकृत रूप से दोबारा निविदा जमा कर दी. इससे टेंडर चाहने वाली कंपनी को मिल गया.

Also read:  मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनकी परेड कराने संबंधी वीडियो सुप्रीम कोर्ट का बयान, कहा कि यह ‘‘बेहद व्यथित