English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-07-23 101930

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी से शुक्रवार को रातभर पूछताछ की। एजेंसी के अधिकारियों ने चटर्जी से आवास पर शुक्रवार सुबह 8 बजे से उनसे पूछताछ शुरू की थी, जो अब भी जारी है।

 

ED को चटर्जी की निकट सहयोगी अर्पिता मुखर्जी की दक्षिण कोलकाता में स्थित एक संपत्ति से 20 करोड़ रुपए नकद राशि मिली है। जब यह कथित घोटाला हुआ था, तब चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे। प्रवर्तन निदेशालय इस घोटाले में कथित रूप में शामिल लोगों के खिलाफ धनशोधन संबंधी पहलू की जांच कर रहा है।

Also read:  Budget 2023: राष्ट्रपति ने कहा- अमृतकाल का यह 25 वर्ष का कालखंड, सरकार के लगभग नौ वर्षों में भारत के लोगों ने अनेक सकारात्मक परिवर्तन पहली बार देखे

बता दें कि इससे पहले कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को दावा किया था कि पश्चिम बंगाल में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) घोटाले में मामले में तृणमूल कांग्रेस के उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी के एक सहयोगी के आवासीय परिसर से लगभग 20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए है। ईडी ने दिन के दौरान चटर्जी के परिसरों पर छापा मारा था।

ED ने एक मीडिया विज्ञप्ति में कहा कि नकदी की गिनती का काम मशीनों से करने के लिए बैंक अधिकारियों की सहायता ले जा रही है। ED ने तलाशी में चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवासीय परिसर से लगभग 20 करोड़ रुपए की भारी नकदी बरामद की है। इस राशि का संबंध SSC घोटाले से होने का संदेह है।

Also read:  ओमान, बहरीन ने मनाया अरबी भाषा का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

विज्ञप्ति के अनुसार तलाशी में इसके अलावा कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड, संदिग्ध कंपनियों का विवरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विदेशी मुद्रा और सोना संबंधितों के विभिन्न परिसरों से बरामद किए गए हैं। केंद्रीय एजेंसी ने यह भी दावा किया कि उसने मुखर्जी के परिसर से 20 से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

Also read:  बिहार में नीतीश कुमार ने इजी स्कूल ट्रैकिंग सिस्टम प्लस एप किया लांच, एप के द्वारा शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति पर रखी जाएगी पैनी नजर

ED के अधिकारियों ने कूचबिहार जिले के मेखलीगंज स्थित शिक्षा राज्य मंत्री परेश अधिकारी के घर पर भी छापेमारी की। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा चटर्जी और अधिकारी से कई बार पूछताछ की गई थी। कलकत्ता हाई कोर्ट के अप्रैल में आदेश के बाद CBI ने घोटाले की जांच शुरू की।