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इलाहाबाद हाई कोर्ट ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वे पर क्या आदेश देता है, इस पर एएसआइ (भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण) टीम की भी नजर है।

वाराणसी की जिला अदालत के फैसले के बाद ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के लिए आए 43 पुराविशेषज्ञ काशी में ही रूके हुए हैं। हाई कोर्ट के फैसले के बाद ही आगे की कार्यवाही को लेकर कोई फैसला करेंगे।

जिला जज ने शुक्रवार को सील वुजूखाने को छोड़ कर पूरे परिसर का एएसआइ सर्वे का आदेश दिया था। इसकी रिपोर्ट चार अगस्त तक पेश करनी थी। 43 सदस्यीय टीम रविवार रात बनारस आ गई थी। पुलिस व जिला प्रशासन के साथ सभी पक्षकारों की बैठक में सोमवार सुबह सात बजे से सर्वे का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया गया।

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आज सुबह नौ बजे शुरू होगी सुनवाई

सोमवार को सुबह साढ़े छह बजे सर्वे शुरू हुआ, मगर दोपहर 12 बजे सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। मस्जिद पक्ष ने मंगलवार को हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर बुधवार को सुबह साढ़े नौ बजे से सुनवाई होगी।

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सर्वे टीम का नेतृत्व अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के पुरातात्विक सर्वेक्षण में शामिल रहे एएसआइ के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी कर रहे हैं। नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के अलावा आगरा, पटना, बनारस, लखनऊ, उन्नाव से आए विशेषज्ञ भी टीम का हिस्सा हैं। कुछ सेवानिवृत्त हो चुके पुरातत्वविदों को भी इसमें शामिल किया गया हैं।

बीते साल मई में ज्ञानवापी परिसर के सर्वे में एडवोकेट कमिश्नर के अलावा दोनों पक्षों के वकील ही शामिल थे। इस बार एएसआइ की विशेषज्ञों की टीम अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से सर्वे करेगी।

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बुधवार को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई और निर्णय पर नजर है। परिसर का वैज्ञानिक पद्धति से पुरातात्विक सर्वे हो जाए, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। -सुधीर त्रिपाठी, वकील, मंदिर पक्ष

सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर बुधवार शाम पांच बजे तक रोक लगाई है। उम्मीद है हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अदालत इससे पहले आदेश दे देगी। फैसला आने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। -एखलाक अहमद, वकील, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद