English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-07-23 105450

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिरने और भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद भी शिवसेना में मचा भूचाल फिलहाल थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

 

चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे से कहा है कि वो दोनों लिखित तौर पर इस बात के सबूत पेश करें कि शिवसेना में बहुमत की संख्या किसके पास है। दोनों गुटों से 8 अगस्त की दोपहर 1 बजे तक जवाब देने के लिए कहा गया है, जिसके बाद चुनाव आयोग शिवसेना के दोनों गुटों के दावों और विवादों को लेकर सुनवाई करेगा।

Also read:  विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज नहीं होते, वास्तविक घटनाओं के सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं हो पाते

आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने शिवसेना पर अपने-अपने दावे जताए हैं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यह कदम उठाया। उद्धव ठाकरे खेमे से अनिल देसाई ने इससे पहले कई बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर दावा किया था कि पार्टी के कुछ सदस्य पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। अनिल देसाई ने शिंदे गुट द्वारा ‘शिवसेना’ या ‘बाला साहेब’ के नाम का इस्तेमाल करके किसी भी राजनीतिक दल का गठन करने पर भी आपत्ति जताई थी।

Also read:  फीफा विश्व कप कतर 2022 के बुनियादी ढांचे का स्वागत करता है

शिंदे गुट ने अपनी दलील में चुनाव आयोग को क्या बताया

इसके बाद अनिल देसाई ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर यह भी मांग की, कि एकनाथ शिंदे, गुलाबराव पाटिल, तानजी सावंत और उदय सामंत को पार्टी में उनके पद से हटाया जाए। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से ‘चुनाव चिन्ह आदेश 1968 के पैरा 15’ के तहत याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि शिंदे के नेतृत्व वाले दल को शिवसेना के तौर पर मान्यता दी जाए और साथ ही उन्हें धनुष-बाण का निशान भी दिया जाए। एकनाथ शिंदे ने चुनाव आयोग को यह भी बताया कि शिवसेना के 55 विधायकों में से 40 विधायक, कई एमएलसी और 18 में 12 सांसदों का समर्थन उनके साथ है।

Also read:  उत्तराखंड में ओपिनियन पोल में बन रही गठबंधन की सरकार, बीजेपी कांग्रेस की कड़ी टक्कर