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भारत सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के तहत शिकायत निवारण तंत्र ‘सब कुछ संतुलित’ करता है और किसी भी तरह का या किसी की आजादी का अतिक्रमण नहीं करता है।

 

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि 2021 की नियमावली का नियम 9 संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत स्वतंत्रता को कायम रखते हुए स्वाभाविक न्याय को संतुलित करता है और उपयोगकर्ताओं को भी संरक्षण दिया जाता है। न्यायमूर्ति खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला भी थे।

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‘किसी भी आजादी का अतिक्रमण नहीं’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि नियम 9 संहिता के पालन से संबंधित है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले साल 2021 के नियमों के नियम 9 के संचालन पर रोक लगा दी थी। मेहता ने कहा है कि शिकायत तंत्र सब कुछ संतुलित करता है और यह किसी भी आजादी का अतिक्रमण नहीं करता है।

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सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख तय

पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की है। पीठ ने कहा है कि हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका पर दो चीजें की जा सकती हैं। पीठ ने आगे कहा या तो हम उनसे सहमत हैं और आक्षेपित आदेश पर रोक लगाते हैं या फिर दूसरी बात कि रिट याचिका को यहां स्थानांतरित किया जाए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को रेगुलेट करने के लिए एक अलग कानून

शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कुछ और याचिकाओं का भी निपटारा किया। इन याचिकाओं में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को रेगुलेट करने के लिए एक अलग कानून बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग भी शामिल है। पीठ ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि आईटी नियम 2021 और केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 लागू हो गए हैं। इन दलीलों का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता को उचित उपाय का सहारा लेने की स्वतंत्रता दी।

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