English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-10-18 112820

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने शराबी पत्नी की हत्या करने के आरोपी को बरी कर दिया। जी दरअसल अदालत ने आरोपी को जेल से रिहा करने का आदेश दिया और कहा कि उसने गैर इरादन हत्या की है।

हाईकोर्ट का कहना है कि, ‘अभियोजन पक्ष आरोपी के हत्या करने के इरादे की व्याख्या करने में सक्षम नहीं है। आरोपी को पत्नी की हत्या करने के लिए उकसाया गया।’ आप सभी को बता दें कि आरोपी ने खाना न बनाने पर अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। जी हाँ और इसी मामले को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा, अभियोजन पक्ष के साक्ष्य से पाया गया है कि महिला ने खाना तैयार नहीं किया। इससे आरोपी गुस्सा हो गया और उसने अपनी पत्नी पर हमला कर दिया।

Also read:  आम आदमी पार्टी की घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष भास्कर राव ने पार्टी से दिया इस्तीफा

 

इस वजह से आरोपी का कथित कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अपवाद-1 के दायरे में आता है। इसके अलावा हाईकोर्ट ने कहा कि महिला की मौत गैर इरादन हत्या थी, जो हत्या के बराबर नहीं थी। आप सभी को बता दें, चिक्कमगलुरु जिले के मुदिगेरे के सुरेश (K Suresha) ने 2017 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वहीँ उसकी अपील पर न्यायमूर्ति के सोमशेखर और न्यायमूर्ति टीजी शिवशंकर गौड़ा की खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई की।

Also read:  बिहार में शराबबंदी कानून के तहत जुर्माना 50 हजार से घटाकर 2000 से 5000 तक किया गया

 

दूसरी तरफ निचली अदालत ने सुरेश को हत्या का दोषी ठहराते हुए नवंबर 2017 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आपको बता दें कि सुरेश की पहली पत्नी का नाम मीनाक्षी है, जिससे वह अलग रह रहा था। उसके बाद उसने राधा नाम की महिला से शादी कर ली, जो अपने पति से अलग रह रही थी। वहीँ सुरेश और राधा के दो बच्चे हैं। साल 2016 में सुरेश एक त्योहार के दिन काम से वापस आया तो उसने देखा कि घर पर जश्न का माहौल नहीं है और पत्नी सो रही है, जिस पर उसने उसे बुरी तरह पीटा। जी दरअसल पत्नी को शराब पीने की आदत थी।

Also read:  देश में कोरोना की रफ्तार में लगा ब्रेक, पिछले 24 घंटे में कोरोना 2,568 नए मामले सामने आए

वहीँ हाईकोर्ट ने निचली अदालत की सजा के आदेश को संशोधित करते हुए सुरेश को आईपीसी की धारा 302 के बजाय आईपीसी की धारा- ।। (गैर इरादन हत्या) के तहत दोषी ठहराया। जी दरअसल अदालत ने कहा कि 6 साल 22 दिन की अवधि आईपीसी की धारा 3024 के भाग-1 के तहत दंडनीय अपराध के लिए पर्याप्त है। इसलिए उसे तुरंत रिहा किया जाए।