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2022 में गुजरात में हुए दंगों पर बीबीसी द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री पर केंद्र सरकार ने बैन लगाया हुआ है। इसे भारत में प्रसारित नहीं किया जा सकता और न कोई देख सकता है। इसको लेकर देशभर में राजनीति हो रही है। कई विश्वविद्यालयों में डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने को लेकर बवाल हुआ है।

 

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्यूमेंट्री पर लगाए गए बैन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अपनी सहमति दी है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किया जाएगा कि डॉक्यूमेंट्री पर लगाया गया बैन सही है या गलत। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ ने इस मुद्दे पर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग करने वाले वकील एम एल शर्मा और सी यू सिंह की दलीलों पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी।

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वकील बोले- लोगों को किया जा रहा गिरफ्तार

डॉक्यूमेंट्री पर बैन हटाए जाने की मांग को लेकर वकील एम एल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट में बैन के खिलाफ दायर याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इसपर सीजेआई ने कहा कि इसे सूचीबद्ध किया जाएगा। वकील सी यू सिंह ने पत्रकार एन राम और वकील प्रशांत भूषण द्वारा दायर याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर एन राम और प्रशांत भूषण के ट्वीट को हटा दिया गया। अजमेर में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री स्ट्रीमिंग के लिए छात्रों को निष्कासित कर दिया गया। इसपर सीजेआई ने कहा कि हम याचिकाओं को सूचीबद्ध करेंगे।

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भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर लगाया है बैन

वकील शर्मा ने डॉक्यूमेंट्री को बैन करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया कि यह दुर्भावनापूर्ण, मनमाना और असंवैधानिक है। बता दें कि BBC ने “इंडिया: द मोदी क्वेश्चन” नाम की दो-भाग की डॉक्यूमेंट्री सीरीज बनाई है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के तनाव को दिखाया गया है। इसके साथ ही 2002 के गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। भारत सरकार ने इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर बैन लगा दिया है।

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