English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-04-26 203020

देश में 10 अप्रैल से सभी वयस्कों के लिए सतर्कता यानी बूस्टर डोज लगवाने की अनुमति दे दी गई है, लेकिन अभी तक सिर्फ 4.64 लाख लोगों ने ही यह डोज लगवाई है। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि डर, भ्रम और गलत जानकारी के चलते लोग सतर्कता डोज लगवाने से बच रहे हैं।

 

विशेषज्ञों के अनुसार सतर्कता डोज लगवाने में हिचक की मुख्य वजह प्रतिकूल प्रभाव का डर, कोरोना का मामूली संक्रमण होने की सोच और इस डोज के असर को लेकर मन में संशय है। विषाणु रोग विशेषज्ञ टी जैकब जान के मुताबिक, सतर्कता डोज को लेकर हिचक इसलिए भी है, क्योंकि नए विशेषज्ञों के दावे भ्रमित करने वाले हैं।

Also read:  एसीई ग्रुप के कई ठिकानों पर आयकर का छापा, अखिलेश के करीबी हैं अजय चौधरी

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के सेंटर आफ एडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलाजी के पूर्व निदेशक जान ने कहा कि लंबे समय तक लोगों को बताया गया था कि पूर्ण टीकाकरण का मतलब दो डोज है, ऐसे में सतर्कता डोज शब्द ने भ्रम की स्थिति पैदा की है।

कोविशील्ड के पास बड़ी संख्या में टीके हैं मौजूद

कोविशील्ड का उत्पादन करने वाले सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) के सीईओ अदार पूनावाला ने बीते हफ्ते कहा था कि उनके स्टाक में बड़ी संख्या में बिना बिके हुए टीके मौजूद हैं। कंपनी ने 31 दिसंबर से टीके का उत्पादन भी बंद कर दिया है। पूनावाला ने यह भी बताया था कि उन्होंने टीके मुफ्त में देने की पेशकश की है, लेकिन उस प्रस्ताव पर भी ज्यादा अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

Also read:  दिल्ली में कोरोना के अब तक के सबसे ज्यादा 7,745 नए मामले आए सामने

लोगों में टीकाकरण को लेकर पैदा हो रही है हिचक

इकरिस फार्मा नेटवर्क के सीईओ प्रवीण सीकरी की नजर में लोग सतर्कता डोज की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि कोरोना संक्रमण की पिछली लहर ज्यादा घातक नहीं थी। उन्होंने कहा कि टीकाकरण विरोधी लोग टीका लगवाने से बच्चों का लिवर खराब होने, खून के थक्के जमने और लोगों की मौत होने जैसी झूठी खबरें फैला रहे हैं, जिससे लोगों में टीकाकरण को लेकर हिचक पैदा हो रही है।

Also read:  2023 के लिए झींगा मछली पकड़ने का मौसम ओमान में शुरू हुआ

सीकरी के मुताबिक टीकाकरण के प्रति हिचक दूर करने के लिए टीकों को लेकर ज्यादा संवाद किए जाने और लोगों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बताना आवश्यक है कि जिन देशों में पर्याप्त टीकाकरण नहीं हुआ है या जिनके पास ज्यादा प्रभावी टीके नहीं हैं, वे कोरोना से बेहद बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।