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 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुंडा के विधायक और पूर्व मंत्री राजा भैया अकेले पड़ते दिखाई दे रहे हैं। उनकी पार्टी ने चुनाव में अकेले उतरने की भी पूरी तैयारी कर रखी है।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासत की पूरी बिसात बिछ चुकी है। इस बार चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी प्रदेश के छोटे-छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी अकेले दम पर ही चुनावी समर में उतर चुके हैं। लेकिन इन तमाम सियासी चालों के बीच कुंडा के विधायक और बाहुबली नेता राजा भैया अकेले पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

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यूपी चुनाव में अकेले पड़े राजा भैया

पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल यूपी की सियासत में अलग-थलग होती दिख रही है। उनके दल की बीजेपी से समझौते की उम्मीद भी लगभग खत्म ही हो गई है। ऐसे में राजा भैया की पार्टी ने अब अकेले ही चुनाव में उतरने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि बावजूद इसके पार्टी के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद शैलेन्द्र कुमार अब भी गठबंधन की संभावनाएं जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनसत्ता दल पार्टी की कोशिश है कि नई सरकार में उनकी पार्टी की भी हिस्सेदारी हो। ताकि राजा भैया की की अगुवाई में पार्टी के लोग गरीब और परेशान जनता की ज़्यादा से ज़्यादा मदद कर सके।

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गठबंधन नहीं हुआ तो अकेले लड़ेंगे चुनाव

इसके साथ ही शैलेन्द्र कुमार ने ये भी कहा कि अगर उनकी पार्टी का कहीं सम्मानजनक तरीके से समझौता नहीं हो पाया तो भी पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। जनसत्ता दल इन चुनावों में 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ सकती है। पार्टी अब तक सोलह सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों का एलान कर चुकी है और साथ ही अपना संकल्प पत्र भी जारी कर चुकी है। उनका कहना है कि पार्टी ने गठबंधन के लिए अध्यक्ष राजा भैया को अधिकृत कर दिया है।