English മലയാളം

Blog

Screenshot 2023-03-15 193847

हाराष्ट्र में पिछले दो दिनों से नासिक से मुंबई के लिए 175 किलोमीटर लंबा ‘लॉन्ग मार्च’ कर रहे किसानों से सरकार द्वारा अब तक बात नहीं करने पर पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने नाराजगी जताई है।

 

उन्होंने सीएम एकनाथ शिंदे को उन किसानों से जाकर मिलने की नसीहत दी है। नाराज उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह दुखद है कि किसानों को तरह का मार्च करना पड़ रहा है। किसान देश के लिए अन्नदाता हैं। सरकार उनकी मांगों को पूरा करने और हल करने के लिए वहां क्यों नहीं जा सकती है।

उद्धव ठाकरे ने बताया कि कैसे, जब 2019 में किसानों ने इसी तरह का ‘लांग मार्च’ किया था, तो उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं को किसानों से मिलने, उनकी समस्याओं को समझने और उनके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने में मदद करने के लिए भेजा था। ठाकरे ने याद किया कि कैसे कोरोनो महामारी के दौरान भी देश के किसानों ने यह सुनिश्चित किया था कि देश को भोजन मिले और अब वह इस संकट के दौरान मदद के पात्र हैं।

Also read:  महाराष्ट्र में कोरोना का फिर बढ़ा कहर, 1932 नए मामले आए सामने

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजीत पवार ने भी राज्य सरकार से आंदोलनकारी किसानों से मिलने और उनकी शिकायतों को हल करने का आह्वान किया। सीपीएम विधायक विनोद निकोल ने भी सरकार से किसानों से मिलने का आग्रह करते हुए कहा कि लास्ट लॉन्ग मार्च के दौरान हजारों महिलाओं ने भी भाग लिया था और चिलचिलाती धूप में लंबी पदयात्रा के दौरान बड़ी समस्याएं आई थीं।

Also read:  झारखण्ड सरकार में अनबन,सोरेन की बैठक से कांग्रेस ने किनारा किया

इस बीच कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) के विपक्षी महा विकास अघाड़ी ने अखिल भारतीय किसान समिति (एआईकेएस) के नेतृत्व में नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च कर रहे 20,000 किसानों को अपना समर्थन दिया है। किसानों का यह ‘लांग मार्च’ सरकार पर अपने 17 सूत्री चार्टर के कार्यान्वयन के लिए दबाव डालने के लिए है। महाराष्ट्र में पिछले 5 साल में यह किसानों का तीसरा लॉन्ग मार्च है।

Also read:  Indore एयरपोर्ट से 200 मीटर दूर मेट्रो स्टेशन बनेगा

राज्य के आंदोलनकारी किसानों की प्रमुख मांगों में संकटग्रस्त प्याज उत्पादकों को 600 रुपये प्रति क्विंटल की अनुग्रह राशि और अगले सीजन से प्याज के लिए 2000 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी और सोयाबीन, अरहर, कपास, हरा चना, दूध और आशा कार्यकर्ताओं के संबंधित मुद्दों आदि के लिए बेहतर पारिश्रमिक मूल्य शामिल है। इसके अलावा बिजली बिल माफी, कर्ज माफी के साथ ही आपदा या बेमौसम बारिश ओलावृष्टि में फसलोंं को नुकसान होने पर उचित मुआवजे की व्यवस्था भी प्रमुख मांगों में शामिल हैं।