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 वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर के एएसआइ सर्वे संबंधी जिला जज वाराणसी के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में बुधवार को दिनभर में दो चरणों में चार घंटे तक सुनवाई चली।

इस दौरान एक बार मुख्य न्यायाधीश ने मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता से कहा, जब आप किसी पर भरोसा नहीं करते हैं, तो फैसले पर कैसे भरोसा करेंगे?

‘टाइम ओवर हो गया, ऐसा तो नहीं कि आपकी टीम सर्वे शुरू कर देगी’

सुनवाई के दौरान शाम करीब 5:07 बजे अचानक मुख्य न्यायाधीश ने हलफनामे में अपनी बात बता रहे एएसआइ के एडिशनल डायरेक्टर आलोक त्रिपाठी को टोका। कहा, टाइम ओवर हो गया, ऐसा तो नहीं कि आपकी टीम वहां सर्वे शुरू कर दे (सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बुधवार शाम पांच बजे तक थी।)

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त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के स्टे आर्डर के बाद एएसआइ टीम परिसर से बाहर निकल गई। अब जो भी होगा, कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही होगा।

मुख्य न्यायाधीश : महिलाओं ने किस सेक्शन के तहत एएसआइ सर्वे की मांग की है, आप (मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता से एसएफए रिजवी) क्या अब इस तरह की दलीलें दे सकते हैं, जब सुनवाई पूरी हो गई है।

एसएफए नकवी : सुनवाई पूरी नहीं हुई है। महिलाओं ने सीपीसी के सेक्शन 75 ई के तहत जिला अदालत में मुकदमा किया था। अदालत ने अर्जी दाखिल होते ही सर्वे का आदेश कर दिया। मंदिर पक्ष ने जिला अदालत से ही सबूत इकट्ठे करने की मांग की है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। आप सबूत इकट्ठा करने के लिए किसी और को नहीं कह सकते हैं। यह गैरकानूनी है।

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मुख्य न्यायाधीश : यदि मंदिर पक्ष सबूत जुटाना चाहता है और कोर्ट इसकी इजाजत देता है तो इसमें समस्या क्या है? सबूत इकट्ठे हो जाएं तो क्या नुकसान होगा?

एसएफए नकवी : मंदिर पक्ष के पास अभी तक कोई सबूत नहीं है।

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विष्णु जैन : हम बिल्डिंग में खोदाई नहीं करेंगे। खाली पड़े हिस्से में खोदाई होगी।

एसएफए नकवी : सर्वे करने का मैकेनिज्म एएसआइ के पास नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश: डिक्क्शनरी लीजिए और ‘एक्जकेवेशन’ का मतलब पढ़िए।

विष्णु जैन: सील्ड एरिया में कोई भी सर्वे नहीं होगा।

एसएफए नकवी : सर्वे में सील्ड एरिया को भी नुकसान पहुंचेगा। वाद पत्र में साफ है कि तीन गुंबदों के नीचे खोदाई होनी है। हमें मंदिर पक्ष पर भरोसा नहीं।

मुख्य न्यायाधीश : जब आपको किसी पर भरोसा नहीं तो हमारे आदेश पर कैसे भरोसा करेंगे? हम आदेश पास करें, उसे हिंदू पक्ष और एएसआइ नहीं मानेगा?