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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को किराया न दे पाने के एक मामले में अहम फैसला सुनाया।

 

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी मजबूरी के चलते अगर कोई किराया नहीं दे सका तो उसने कोई अपराध नहीं है।साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक मकान मालिक की इसी मामले में दर्ज की गई याचिका को भी खारिज कर दिया है।

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IPC के तहत नहीं दर्ज हो सकता केस

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि अगर किराएदार किसी मजबूरी के चलते बकाया किराए की रकम नहीं देता तो हमारा मानना है कि यह कोई क्राइम नहीं है, भले ही शिकायत में दिए तथ्य सही हों। किराया न चुका पाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन IPC के तहत केस दर्ज नहीं होगा।

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मामले से जुड़ी एफआईआर भी रद की

बेंच ने कहा कि केस में धारा 415 (धोखाधड़ी) और धारा 403 (संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग) के तहत अपराध को साबित करने वाली जरूरी और बुनियादी बातें गायब हैं। कोर्ट ने मामले से जुड़ी FIR भी रद कर दी है. इसके पहले यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास था, लेकिन कोर्ट ने अपीलकर्ता के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।

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‘सिविल रेमेडीज के तहत सुलझ सकता है मामला’

दलीलें सुनने के बाद बेंच ने कहा कि किराएदार ने संपत्ति को खाली कर दिया है तो इस मामले को सिविल रेमेडीज के तहत सुलझाया जा सकता है, इसके लिए कोर्ट इजाजत देता है।