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वर्षा के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन पटरी से उतर गया है। इसके चलते चारधाम यात्रा मार्ग पर तीर्थ यात्रियों के साथ गंगाजल भरने जाने वाले कांवड़ियों को भी दिक्कत हो रही है।

बदरीनाथ हाईवे तोताघाटी और कौड़ियाला में 14 घंटे बाद खोला जा सका। इसके अलावा बुधवार शाम को टिहरी जिले के मुल्यागांव, छिनका और रुद्रप्रयाग जिले में सिरोबगड़ व चमोली जिले में कचनगंगा, टंगड़ी पातालगगंगा, छिनका, पीपलकोटी, पागलनाला में मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे अवरुद्ध हो गया है। इसके चमोली जिले में विभिन्न स्थानों पर 3000 तीर्थयात्रियों को रेाका गया है। इसके अलावा पातालगंगा में पहाड़ी से लगातार भारी पत्थर गिर रहे हैं।

उधर, गंगोत्री हाईवे पर सुनगर और गंगानाली में लगभग 2000 कांवड़िये फंस गए हैं। साथ ही धराली के पास खीरगंगा के उफान में भी 400 कांवड़ यात्री फंसे हैं। जबकि, यमुनोत्री हाईवे झंझर गाड के पास, सिलक्यारा, कुथनौर और रानाचट्टी के पास भी अवरुद्ध है। इसके अलावा गढ़वाल क्षेत्र में पांच हाईवे, चार राज्यमार्ग और 170 संपर्क मार्ग समेत 179 सड़कें अवरुद्ध हैं। साथ ही 323 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।

तीन मकान बहे, अन्यत्र गांव बसाने की मांग

भारी वर्षा के चलते वीरोंखाल प्रखंड के अंतर्गत कुणजोली गांव में तीन ग्रामीणों के मकान भूकटाव की चपेट में आ गए, जबकि सात ग्रामीणों के भवन खतरे की जद में हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से ग्रामीणों को विस्थापित करने की मांग की है। पूर्व प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह गुसाईं ने बताया कि इन दिनों भारी वर्षा के कारण पंचराड नदी उफान पर है। कुणजोली गांव भी पंचराड नदी के किनारे बसा है। नदी से हुए भूकटाव से जयपाल सिंह, भगत सिंह व कुलदीप के मकान जमींदोज हो गए हैं। उधर, पौड़ी-थलीसैंण-रामनगर राष्ट्रीय राजमार्ग कैन्यूर के समीप बाधित है। सहायक अभियंता गिरधर टम्टा ने बताया कि अगले तीन दिनों में राजमार्ग को बड़े वाहनों के लिए भी खोल दिया जाएगा।

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उत्तरकाशी से ही गंगाजल भर रहे कांवड़िये

गंगोत्री हाईवे बुधवार सुबह उत्तरकाशी से गंगोत्री के बीच कई स्थानों पर अवरुद्ध होने से कांवड़ यात्री उत्तरकाशी के पौराणिक घाट से ही गंगाजल भर रहे हैं। बुधवार को उत्तरकाशी के मणिकर्णिका घाट, जड़भरत घाट, गंगोरी घाट से सैकड़ों की संख्या में कांवड़ यात्रियों ने गंगाजल भरा। उधर, गंगोत्री हाईवे पर धराली के पास खीरगंगा के उफान से गंगोत्री की ओर बीती मंगलवार को करीब 3000 से अधिक कांवड़ यात्री फंसे थे। इन कांवड़ यात्रियों को बीआरओ और स्थानीय निवासियों के सहयोग से देर रात दो बजे तक रेस्क्यू किया जा सका। कल्प केदार मंदिर के निकट लकड़ी की एक वैकल्पिक पुलिया भी बनाई, जिससे कांवड़ यात्रियों को निकाला गया।

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इस स्थान पर बड़े वाहनों की आवाजाही तो हो रही है, लेकिन दोपहिया वाहनों का संचालन पूरी तरह अवरुद्ध है। बीती रोज गंगनानी के पास हुई दुर्घटना के बाद वाहनों की आवाजाही को लेकर शेड्यूल जारी कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने बताया कि वर्षाकाल और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए गंगोत्री से उत्तरकाशी की ओर आने वाले वाहनों को पांच बजे तक ही अनुमति होगी। हर्षिल से उत्तरकाशी के लिए आने वाले वाहन केवल छह बजे तक ही आ पाएंगे, जबकि भटवाड़ी से सात बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। खास परिस्थिति में ही वाहनों की आवाजाही होगी। भटवाड़ी से गंगोत्री जाने वाले वाहनों को 6.30 बजे के बाद अनुमति नहीं मिलेगी।

विश्राम गृह की सुरक्षा दीवार ढही

कर्णप्रयाग-गैरसैंण राज्यमार्ग पर आदिबदरी में पुरातत्व विभाग के विश्राम गृह की सुरक्षा दीवार ढह गई। डेढ़ माह पहले ही 20 लाख की लागत से इसका निर्माण किया गया था। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष विजयेश नवानी ने कहा कि, मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसे लेकर अवर अभियंता पुरातत्व विभाग प्रमोद सेमवाल का कहना है कि ठेकेदार को फिर से सुरक्षा दीवार का निर्माण करने के लिए कहा गया है। आंगन की दीवार में ठेकेदार ने सीमेंट की कंक्रीटिंग नहीं की थी, जिससे दीवार ढही है।

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पिछले चार दिन में 13 मीटर बढ़ा टिहरी झील का जलस्तर

बीते चार दिन में टिहरी झील का जलस्तर 13 मीटर बढ़ गया है। बीती रविवार को टिहरी झील का जलस्तर 764 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि बुधवार को यह 777 मीटर हो गया। लगातार वर्षा से भागीरथी और भिलंगना नदी से 1600 क्यूमैक्स पानी प्रतिदिन टिहरी झील में आ रहा है। टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एलपी जोशी ने बताया कि टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन भी ऋषिकेश और हरिद्वार में बाढ़ का खतरा कम करने के लिए ज्यादा पानी झील में स्टोर कर रहा है। झील से महज 139 क्यूमैक्स पानी भागीरथी नदी में छोड़ा जा रहा है।