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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 80 रुपए प्रति डॉलर ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ चुका है और चालू वित्त वर्ष में इसमें कोई सुधार होने की उम्मीद नहीं है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण मध्यम अवधि में रुपया और नीचे जा सकता है।

 

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स्विस ब्रोकरेज यूबीएस सिक्योरिटीज ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि रुपया इस साल अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7.5 प्रतिशत टूट चुका है। यह मार्च तक 80 प्रति डॉलर के स्तर पर रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू खाते के घाटे (कैड) पर दबाव को देखते हुए रुपए के लिए कोई राहत नहीं होगी और मध्यम अवधि में इसमें और गिरावट आ सकती है।

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यह बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी कोषों द्वारा बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण होगा। विदेशी निवेशकों ने चालू साल की शुरुआत से अबतक भारत से 29 अरब डॉलर या अपने निवेश का 4.4 प्रतिशत निकाल लिया है।

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