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उत्तर प्रदेश सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि उनका मंत्री बनना अप्रत्याशित नहीं, बल्कि एक समर्पित कार्यकर्ता में पार्टी द्वारा व्यक्त विश्वास का प्रतीक है। इसके साथ ही और विपक्षी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के चेहरे पर करारा “तमाचा” भी है।

 

यूपी विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य नहीं दानिश अंसारी बलिया से हैं, उन्होंने शुक्रवार को योगी आदित्यनाथ की सरकार में 52 मंत्रियों में से एक के रूप में शपथ ली।

दानिश ने कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि मुझे अवसर दिया गया है। मंत्री के रूप में मेरी नियुक्ति भाजपा द्वारा सपा (समाजवादी पार्टी) और कांग्रेस के लिए एक तमाचा है। योगी सरकार की हर योजना का लाभ मुसलमानों को मिला है। योजनाओं में मुसलमानों की भागीदारी है। मैं मुसलमानों को एक साथ लाने का प्रयास करूंगा।”

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उन्होंने कहा, “मैं अपने जैसे साधारण पार्टी कार्यकर्ता को इतना बड़ा अवसर देने के लिए पार्टी का धन्यवाद करता हूं। मैं अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करूंगा।”

यह पूछे जाने पर कि क्या मंत्री पद मिलना अप्रत्याशित था, उन्होंने कहा, “नहीं, ऐसा नहीं था। भाजपा प्रत्येक कार्यकर्ता की कड़ी मेहनत को पहचानती है। मेरे लिए यह पार्टी द्वारा अपने समर्पित कार्यकर्ता में दिखाए गए भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा में मुसलमानों का विश्वास बढ़ा है।

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उन्होंने कहा, “भाजपा द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से मुसलमानों को फायदा हो रहा है। यह सरकार योजनाओं का लाभ देने से पहले किसी की जाति और धर्म नहीं पूछती। भाजपा मुसलमानों की बुनियादी सुविधाओं और जरूरतों के लिए काम करती है।”

दानिश अंसारी ने मोहसिन रज़ा की जगह ली, जिन्होंने पिछली योगी आदित्यनाथ सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया, जो कि एकमात्र मुस्लिम चेहरा था।

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32 वर्षीय दानिश भाजपा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में 2010 में शामिल हुए थे, जब वह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र थे। उनके पास लोक प्रशासन और गुणवत्ता प्रबंधन में मास्टर डिग्री है।

उन्हें अक्टूबर 2018 में योगी सरकार में उर्दू भाषा समिति के लिए नामित किया गया था और इसके साथ ही उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिला था। अंसारी को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का महासचिव नियुक्त किया गया था।