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भारत और अमेरिका (India-US Relations) के बीच ‘टू प्लस टू’ वार्ता इस महीने बाद में या फरवरी में वाशिंगटन (Washington) में हो सकती है।

 

विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने इस हफ्ते अपने अमेरिकी और रूसी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। जयशंकर दोनों देशों के साथ व्यापक क्षेत्रों में नियोजित बातचीत करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने भारत संग दोनों मुल्कों के रिश्तों की समीक्षा की है। जयशंकर ने मंगलवार को ट्वीट किया कि उन्होंने सोमवार रात अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) के साथ व्यापक बातचीत की। इस बाचतीत में वर्तमान द्विपक्षीय मुद्दों, हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) और दबाव वाले वैश्विक मामलों को शामिल किया गया।

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विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि इस दौरान दोनों नेताओं द्वारा नववर्ष पर शुभकामनाओं का आदान प्रदान हुआ। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब भारत और अमेरिका (India-US Relations), विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तर पर ‘टू प्लस टू’ वार्ता के अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं। समझा जाता है कि ‘टू प्लस टू’ वार्ता इस महीने बाद में या फरवरी में वाशिंगटन (Washington) में हो सकती है. यह वार्ता हिंद-प्रशांत सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को निर्देशित करने और रक्षा अनुसंधान और विनिर्माण पर सहयोग में मदद करेगी।

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रूसी विदेश मंत्री से भी की बात

वहीं, जयशंकर ने अन्य ट्वीट में कहा, ‘आज शाम को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) के साथ नये साल की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया। वार्षिक सम्मेलन और ‘टू प्लस टू’ बैठक के बाद की प्रगति पर चर्चा की। लगातार संपर्क बनाए रखने को लेकर सहमति बनी।’ रूसी दूतावास (Russian embassy) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि भारतीय पक्ष द्वारा शुरू की गई फोन पर बातचीत के दौरान, लावरोव और जयशंकर ने भारत-रूस शिखर सम्मेलन के नतीजों के फोलो-अप के रूप में द्विपक्षीय सहयोग के व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा की।

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इन मुद्दों पर हुई चर्चा

दूतावास के बयान में कहा गया है कि दोनों मंत्रियों ने अर्थव्यवस्था और निवेश, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, उच्च प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के संबंधों को लगातार मजबूत करने के इरादे की पुष्टि की। उन्होंने आगामी उच्च स्तरीय संपर्कों की तैयारियों पर चर्चा की। इसमें व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग की बैठक और दोनों विदेश मंत्रालयों के नेतृत्व के बीच अन्य बैठकें शामिल हैं।