English മലയാളം

Blog

Screenshot 2023-02-02 142316

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) चुनाव आयोग से मिलकर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल की मान्यता समाप्त करने की मांग करेगा। संगठन ने कहा है कि इन दोनों दलों के प्रमुख नेता स्वामीप्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

 

चुनाव आयोग में एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दिए जाने के समय सभी पार्टियों को इस बात की शपथ देनी पड़ती है कि वह संविधान की पंथनिरपेक्षता की भावना का सम्मान करेगा। लेकिन इन दलों के नेताओं ने हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक पर अभद्र टिप्पणी कर अपने शपथ का उल्लंघन किया है। आरोप है कि यूपी में रामचरितमानस की प्रतियां भी जलाई गईं।

Also read:  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए होटलों को गिराने का किया आदेश जारी

विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने गुरुवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि विश्व हिंदू परिषद का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल शीघ्र ही मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर इन दलों की मान्यता रद्द करने की मांग करेगा। उन्होंने इस संबंध में समय लेने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से विहिप ‘रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951’ की धारा 29ए का हवाला देते हुए चुनाव आयोग को बताएगी कि हर राजनैतिक दल को अपनी पार्टी के मेमोरेंडम के प्रावधानों में विश्वास रखते हुए पंथनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का निष्ठा के साथ पालन करना चाहिए।

Also read:  गौतमबुद्ध नगर जिले में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत सार्वजनिक सभा पर प्रतिबंध

उन्होंने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी के नेता स्वामीप्रसाद मौर्य के रामचरित मानस पर दिए गए बयानों, उसे प्रतिबंधित करने की मांग और उनके सहयोगियों के मानस के पवित्र पन्नों को जलाने से भारत के नागरिकों के बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर राजनीतिक लाभ के लिए घृणित तरीके से भड़काया गया। इसके तुरंत बाद मौर्य को पदोन्नत कर समाजवादी पार्टी का महामंत्री बनाया जाना भी यह स्पष्ट करता है कि इस कार्य में उन्हें अपनी पार्टी का समर्थन हासिल था। इसी प्रकार राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के शिक्षामंत्री डॉ चंद्रशेखर ने भी रामचरित मानस पर घृणित टिप्पणी और प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

Also read:  शिवसेना किसकी है? उद्धव ठाकरे की या एकनाथ शिंदे की? इस मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई