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अडानी ग्रुप ने हिडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद अपने बिजनेस से जुड़े अब सभी सवालों के सटीक जवाब दिए हैं। अडानी ग्रुप की तरफ से सभी 88 सवालों के जवाब दिए गए हैं।

 

अडाणी ग्रुप ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को कट- पेस्ट बताया है। साथ ही 88 में से 68 सवाल फर्जी बताए हैं। इसके अलावा अमेरिकी कंपनी पर 4 सवाल भी उठाए हैं। इस रिपोर्ट में हिंडनबर्ग की तरफ से अडानी ग्रुप पर मार्केट वैल्यू में हेरफेर करने के आरोप लगाए गए, जिसका जवाब अब अडानी समूह ने दिया है।

अडानी ग्रुप ने उठाए सवाल?

पहला- रिपोर्ट में लगाए आरोप बेबुनियाद है। यह भारत की आजादी, अखंडता और गुणवत्ता पर हमला है।

दूसरा- रिपोर्ट को आधे-अधूरे तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है।

तीसरा- IPO लॉन्च होने से पहले रिपोर्ट जारी की गई, यह बदनाम करने की कोशिश है।

चौथा- रिपोर्ट में एक स्वार्थी मानसिकता नजर आती है। फर्म ने इंटरनेशनल बिजनेस कानूनों का भी उल्लंघन किया है।

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अडानी ग्रुप- हिंडनबर्ग शॉर्ट सेलर

हिंडनबर्ग ने शेयर ग्रुप को मिले पर्याप्त उधार यानी Substantial Debt की अलोचना की है। साथ ही अपने ऑडिटर्स को जटिल ऑडिट प्रक्रिया करने में सक्षम नहीं बताया है। इसपर कंपनी ने जवाब दिया है कि अडानी के पोर्टफोलियो में अत्याधिक प्रभावी आंतरिक और ऑडिट कंट्रोल है और सभी सूचीबद्ध कंपनियों का सॉलिड गवर्नेंस स्ट्रक्चर है।

हिंडनबर्ग की 413 पन्नों की रिसर्च रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप ने हिंडनबर्ग पर एक अनैतिक शॉर्ट सेलर कहकर हमला किया है। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि अडानी पोर्टफोलियो और अडानी वर्टिकल भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में लाने पर केंद्रित हैं। इस रिपोर्ट के सार में कंपनी ने कहा है कि यह एक झूठ है और कुछ नहीं।

रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार

अडानी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अडानी स्टॉक्स में शॉर्ट पोजिशन होल्ड करने, जिसे सीधे शब्दों में कहें तो स्टॉक गिरने पर दांव लगा रहा है। इसके अलावा रिपोर्ट को एक झूठ का पुलिंदा करार दिया ङै। साथ ही सभी सवालों को निराधार बताया है और कंपनी को बदनाम करने की बात इन सवालों के जवाब में कंपनी की तरफ से की गई है। रिपोर्ट जारी होने के बाद अडानी ग्रुप ने हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

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रिपोर्ट से भारतीय नागरिकों को दुख पहुंचा

कंपनी के लीगल हेड ने अपने बयान में कहा कि रिपोर्ट की वजह से भारतीय शेयर बजाराों में हुई अस्थिरता बहुत चिंता का विषय है। इसने भारतीय नागरिकों को दुख पहुंचाया है।

शेयर प्राइज पर गलत प्रभाव डाले गए

इस रिपोर्ट पर जतिन जालंधवाला का कहना है कि स्पष्ट रूप से रिपोर्ट और इसमें दी जानकारी जानबूझकर कंपनी के शेयर प्राइज पर गलत प्रभाव डालने के लिए डिजाइन किया गया था। इन्वेसटर्स ग्रुप और आम जनता को गुमराह करने और अडानी ग्रुप के लीडर्स की छवि को धूमिल करने और FPO को नुकसान पहुंचाने के लिए इस रिपोर्ट को जानबूझकर जारी किया गया है।

रिपोर्ट की टाइमिंग पर सवाल

इसके अलावा अडानी ग्रुप के लीगल हेड ने रिपोर्ट की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि निश्चित रूप से जिस समय इस रिपोर्ट को जारी किया गया है, उसका सीधा उद्देश्य कंपनी के FPO को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य के इरादे से किया गया है।

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इसके अलावा अडानी ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर जुगशिंदर सिंह ने कहा – समूह हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बारे में हैरान था। इन सभी आरोपों को भारतीय सर्वोच्च अदालतों ने परखा और खारिज किया है। इसके अलावा कंपनी ने कहा है कि रिपोर्ट जारी करने से पहले फर्म ने किसी तरह के तथ्य को सत्यापित करने की कोशिश नहीं की।

हिंडनबर्ग फर्म ने कहा- कानूनी कार्रवाई का स्वागत

इससे पहले हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा था कि वह अडानी समूह पर अपनी रिपोर्ट के साथ पूरी तरह से खड़ा है। उनके खिलाफ की गई, कोई भी कानूनी कार्रवाई योग्यताहीन होगी। कंपनी की तरफ से कानूनी कार्रवाई का हम स्वागत करेंगे।