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 कलेक्टर मनीष सिंह ने निगम अफसरों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक के विक्रेता और भंडारण करने वालों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ऐसे लोगों के खिलाफ रासुका की कार्रवाई भी करेगा। आपको बता दे की शहर में धड़ल्ले से अभी भी सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है।

 

गुजरात और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों में तैयार अमानक पालीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक को इंदौर में खपाया जा रहा है। नगर निगम अभी तक अमानक पालीथिन के कई विक्रेताओं और भंडारकों पर छापा मारकर सामग्री जब्त कर चुका है। लाखों रुपये के स्पाट फाइन भी किए गए हैं। जिला प्रशासन ऐसे लोगों पर रासुका के तहत कार्रवाई भी करेगा। शहर में कई बाजारों में धड़ल्ले से प्लास्टिक के गिलास, प्लास्टिक फिल्म वाले कागज के दोने, चाय के कप आदि बिक रहे हैं। डिस्पोजेबल की बिक्री करने वाली दुकानों से कई लोगों का रोजगार जुड़ा है। इस वजह से जिला प्रशासन सख्ती नहीं कर पा रहा है। इस तरह का कचरा निगम के सूखे कचरे के बोझ को बढ़ा रहा है।

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डिस्पोजेबल भी सिंगल यूज उत्पाद में आता है, लेकिन इस पर रोक लगाने में भी निगम व जिला प्रशासन अब तक नाकाम रहा है। इनकी आड़ में अमानक स्तर के प्लास्टिक के गिलास और कप भी बिक रहे हैं। जिला प्रशासन व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने अभी तक इनके निर्माताओं पर रोक लगाने की कोई कार्रवाई नहीं की है।

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