English മലയാളം

Blog

WhatsApp Image 2022-01-21 at 4.17.14 PM

उत्तराखंड राज्य बनाने की मांग में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा था लेकिन राज्य बनने के बाद भी यहां के लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है. राज्य के लोग रोजगार के लिए बाहरी राज्यों में पलायन कर रहे हैं।

उत्तराखंड के सहसपुर विधानसभा की 70 प्रतिशत आबादी गांव में बसती है। राज्य बनने के बाद से यहां के लोगों को रोजगार के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. सहसपुर के रहने वाले आर्येंद्र शर्मा यहां के लोगों के मसीहा बने हुए हैं। वे लोगों को सेलाकुई सिडकुल में रोजगार दिलने में मदद करते हैं, लेकिन 15 सालों से दूसरे दल का विधायक होने से वहां ठेकेदारी प्रथा के तहत रोजगार नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह से सहसपुर की गरीब-लाचार जनता को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और वे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं।

Also read:  Coronavirus India: पिछले 24 घंटे में कोरोना के 30005 नए मामले, संक्रमणमुक्त मरीजों की संख्या 93 लाख के पार

वहीं, आर्येंद्र शर्मा का कहना है कि अगर वे यहां के जनप्रतिनिधि बनेंगे तो वे यहां की जनता के लिए रोजगार के लिए कई उद्योग लगवाएंगे और लोगों को अपने घर में रोजगार सृजन करवाएंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में एनडी तिवारी सरकार के गठन के बाद जब सिडकुल की स्थापना हुई थी तब उद्योगों के साथ सीधा समझौता हुआ था कि सत्तर प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जायेगा। लेकिन अब तक समझौते को लागू नहीं किया गया। बल्कि ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से रोजगार देकर युवाओं का शोषण किया जा रहा है। कांग्रेस की सरकार प्रदेश में बनने पर ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर स्थानीय युवाओं को उद्योगों में सत्तर फीसदी रोजगार सीधे दिया जायेगा।

Also read:  National Herald Case: ईडी आज फिर राहुल गांधी से करेगी पूछताछ, देंगे कई सवालों के जवाब

वहीं हर गांव में अति लघु, कुटीर, लघु उद्योग लगाए जाएंगे जिसके माध्यम से प्रशिक्षण और 100 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा। रोजगार के माध्यम से गांव के युवा, बुजुर्ग महिलाओं को खुशहाली मिलेगी और गांव का विकास होगा। गांव में डेरी उद्योग के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाएगा। यहां के उद्योगों में तैयार किया गया समान राज्य और राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों बाजारों से सीधे जोड़ा जाएगा जिससे उत्पादों की बिक्री और लोगों को स्थाई आय प्राप्त होगी।

Also read:  झारखंड के संथाल आदिवासी समाज लड़की पर रंग डालने से डरते हैं पुरुष, लड़की पर रंग डालने पर शादी करो या जुर्माना भरो

वहीं महिलाओं के लिए स्वंय सहायता समूह के माध्यम से गांव-गांव में रोजगार  दिलाया जाएगा। स्वंय सहायता समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर के हुनर हार्ट और अन्य कार्निवल में स्टॉल के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक सहसपुर की महिलाओं और उत्पादों को पहचान दिलाएंगे।