English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-06-28 112617

मांडर का मैदान मारने के साथ झारखंड की महागठबंधन सरकार ने उपचुनाव में जीत का चौका जड़ दिया है। शिल्पी नेहा तिर्की की इस जीत के साथ 22 साल बाद मांडर सीट पर कांग्रेस की वापसी हुई है।

 

ऐसे महागठबंधन का उत्साहित होना लाजिमी है। आय से अधिक संपत्ति मामले में सदस्यता गवाने के बाद बंधु तिर्की अपने बेटी को चुनाव जीतने में सफल रहे। मांडर की जनता ने भी कांग्रेस के चुनाव प्रचार का समर्थन करते हुए बन्धु तिर्की पर लगे भ्र्ष्टाचार के आरोप को एक तरह से खारिज कर दिया। दूसरी ओर भाजपा इस हार पर आत्मंथन करने में जुट गई है, मगर एक बात ऐसी भी है जिससे वह खुश भी हो रही है।

Also read:  कतर में ओमिक्रॉन के किसी भी मामले में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता नहीं - डॉ खली

मांडर उपचुनाव में जीत के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और जे एम एम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने इस जीत को हेमंत सोरेन सरकार के काम-काज पर जनता की मुहर बताया है. महागठंबधन का मानना है कि झूठ, प्रपंच और षड्यंत्र का जवाब मांडर की जनता ने वोट की चोट से दे दिया है। एक तरफ कांग्रेस और जेएमएम खुश है तो भाजपा हार पर मंथन कर रही है।

Also read:  हेमंत बिस्वा शर्मा के ने राहुत गांधी पर कसा तंज, बोले- कहा-भारत जुड़ा हुआ है, पाकिस्तान जाकर यात्रा करें राहुल गांधी

मांडर में भाजपा की मुश्किलें
दरअसल, एक सच है कि मांडर विधानसभा सीट हमेशा से ही बीजेपी के लिये चुनौतीपूर्ण रही है। साल 2014 के परिणाम की बात छोड़ दें, तो बीजेपी हमेशा ही यहां पिछड़ती रही है. हालांकि, इस बार बीजेपी ने खास रणनीति बनाई थी। बड़े नेताओं के चुनाव प्रचार से लेकर ओवैसी कार्ड पर बीजेपी को काफी उम्मीद थी, लेकिन परिणाम फिर एक बार बीजेपी के अनुकूल नहीं रहा।

Also read:  अग्निपथ योजना' मनमानी नहीं-सुप्रीम कोर्ट

…फिर क्यों खुश है भाजपा?
अब बीजेपी के नेता इस हार के बाद आत्ममंथन में जुट गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के अनुसार चुनावी राजनीति के इतिहास में पहली बार बीजेपी को इतने वोट मिले हैं। मांडर के सामाजिक समीकरण पार्टी के अनुकूल नहीं है, फिर भी जनता का समर्थन बीजेपी को मिला है। इस समर्थन के बूते बीजेपी राज्य सरकार की नाकामियों के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहेगी।