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दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार का बजट आज मंगलवार (21 मार्च) को पेश नहीं हो सकेगा। विधानसभा के इतिहास में शायद ऐसा पहली दफा होगा, जब बजट तय तारीख पर पेश नहीं हो पाएगा।

 

ऐसे में माना जा रहा है कि, केंद्र और अरविंद केजरीवाल सरकार के बीच टकराव का नया अध्याय शुरू होने को है। सोमवार की शाम को खुद सीएम केजरीवाल ने इस अप्रत्याक्षित घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद दिल्ली सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के सूत्रों के हवाले से चीजें साफ होने लगीं। दरअसल, दिल्ली सरकार का दावा है कि गृह मंत्रालय ने बजट पेश करने पर रोक लगा दी है। वहीं, गृह मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बजट पर दिल्‍ली सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया है। गृह मंत्रालय का कहना है कि बजट में इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर से अधिक राशि विज्ञापन खर्च के लिए आवंटित की गई है। इस पर केजरीवाल सरकार ने कहा कि इस साल के बजट में विज्ञापन पर खर्च नहीं बढ़ाया गया है।

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सीएम केजरीवाल ने एक साक्षात्कार में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया था कि मंगलवार (21 मार्च) को दिल्ली सरकार का बजट पेश नहीं हो सकेगा। केजरीवाल ने कहा कि, ‘आपको जानकर हैरानी होगी कि, भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है। कल सवेरे (मंगलवार को) दिल्ली सरकार का बजट पेश होना है विधानसभा में, मगर केंद्र सरकार ने आज (सोमवार) शाम को हमारे बजट पर रोक लगा दी है। अब कल (मंगलवार) सुबह बजट पेश नहीं होगा। दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को, डॉक्टर्स को, टीचर्स को, किसी को भी आज से वेतन नहीं मिलने वाला है। आखिर ये चल क्या रहा है?’ बता दें कि, दिल्ली सरकार के सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली के बजट पर रोक लगा दी है, इसी कारण अब मंगलवार को दिल्ली का बजट पेश नहीं हो सकेगा।

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वहीं, इस खुलासे के कुछ ही देर बाद केंद्र सरकार के सूत्रों ने जानकारी दी है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केजरीवाल सरकार का बजट रोका नहीं है, बल्कि दिल्ली सरकार से कुछ बिंदुओं पर सफाई मांगी है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार के बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर से अधिक विज्ञापन पर खर्च का प्रावधान किया गया है। इसीलिए दिल्ली सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा गया है, जो दिल्ली सरकार की तरफ से अभी तक नहीं दिया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्‍ली सरकार से 3 प्रमुख बिंदुओं पर स्‍पष्‍टीकरण मांगा गया है। दरअसल, दिल्ली सरकार के बजट का सिर्फ 20 फीसद पूंजीगत व्‍यय पर खर्च करने का प्रस्‍ताव है। केंद्र का कहना है कि, देश की राजधानी और एक महानगर के लिए इतना पर्याप्त नहीं। वहीं, दिल्ली सरकार ने प्रचार-प्रसार पर खर्च को दो वर्षों में दोगुना कर दिया है, LG इस पर स्पष्टीकरण चाहते हैं। तीसरा बिंदु यह है कि, आयुष्‍मान भारत सहित अन्‍य केंद्रीय योजनाओं का लाभ दिल्‍ली की जनता को क्‍यों नहीं दिया जा रहा, LG ने इसपर भी जवाब मांगा है।

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LG ऑफिस के सूत्रों ने जानकारी दी है कि दिल्ली के उप-राज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने 9 मार्च को ही कुछ टिप्पणियों के साथ दिल्ली सरकार के एनुअल फाइनैंशनल स्टेटमेंट 2023-24 को मंजूरी देकर फाइल सीएम केजरीवाल को भेज दी थी। उसके बाद दिल्ली सरकार ने बजट पर राष्ट्रपति की मंजूरी लेने के लिए कानून के अनुसार, गृह मंत्रालय को एक पत्र भेजा था। गृह मंत्रालय ने 17 मार्च को दिल्ली सरकार को अपनी कुछ टिप्पणियों के बारे में जानकारी दी थी। बजट 21 मार्च को पेश होना था, किन्तु LG ऑफिस को सोमवार की शाम तक भी सीएम केजरीवाल की तरफ से फाइल नहीं भेजी गई। इसी कारण बजट पेश करने में दिक्कत आई है।