English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-08-17 153924

बिहार में नए मंत्रीमंडल के गठन के साथ ही विवाद भी बढ़ते जा रहे हैं। अब प्रदेश के नए कानून मंत्री के खिलाफ ही कोर्ट ने वारंट जारी किया है। आरजेडी के कार्तिक सिंह २०१४ के अपहरण के एक मामले में आरोपी हैं।

 

अग्रिम जमानत पर सुनवाई के संबंध में उनको दानापुर कोर्ट में पेश होना था, लेकिन वह मंत्रीपद की शपथ ग्रहण करने चले गए। गजब तो यह कि कार्तिक कोर्ट की नजर में फरार भी चल रहे हैं। १२ अगस्त को कोर्ट के एक और आदेश के अनुसार मंत्री कार्तिक के खिलाफ एक सितंबर तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है।

Also read:  भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए घूस का प्रमाण जरूरी-सुप्रीम कोर्ट

फिर गरमाई बिहार की सियासत

मामले में सीएम नीतीश कुमार के बयान के बाद प्रदेश की सियासत फिर गरमा गई है। बीजेपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने सीएम नीतीश को घेरते हुए कहा कि उनके जानते-बूझते यह सब हुआ है। नए मंत्रीमंडल में बाहुबलियों की भरमार कर नीतीश कुमार ने प्रदेश में जंगलराज की वापसी आसान कर दी है।

Also read:  PM मोदी आज करेंगे Thane और Diva को जोड़ने वाली दो नई रेलवे लाइनों का उद्घाटन

वहीं, कानून मंत्री कार्तिक ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने हलफनामे में सबकुछ बता दिया था। जनता से कुछ भी नहीं छिपाया, वह बेकसूर हैं। जानकारी के अनुसार नई सरकार के गठने के बाद पहली बार बुधवार की शाम लालू यादव भी पटना पहुंच रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सियासत का पारा अभी और चढ़ेगा।

Also read:  बिक चुके 'मोइरा, द वर्ल्ड टूर कतर' कॉन्सर्ट के लिए पूरी तरह तैयार

२०१४ में हुए अपहरण के मामले में आरोपी

बिहार के नए कानून मंत्री और विधान परिषद सदस्य कार्तिक सिंह पूर्व विधायक और बाहुबली अनंत सिंह के करीबी भी माने जाते हैं। आरोप है कि २०१४ में अनंत सिंह के साथ कार्तिक व अन्य लोग बिहटा में राजू सिंह का अपहरण करने गए थे। उसी मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। इसी मामले में कार्तिक सिंह के खिलाफ वारंट जारी हुआ था।