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 लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनने के बाद सोमवार को कांग्रेस के चार सदस्यों का निलंबन वापस ले लिया गया जिसके साथ ही मानसून सत्र में सदन के भीतर पिछले कई दिनों से चल रहा गतिरोध खत्म हो गया।

 

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मणिकम टैगोर, टी एन प्रतापन, ज्योतिमणि और राम्या हरिदास का निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी।

लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के दौरान तख्तियां दिखाकर प्रदर्शन करने और आसन की अवमानना करने के मामले में गत 25 जुलाई को कांग्रेस के इन चार सदस्यों को चालू सत्र की शेष अवधि के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया था। इन सदस्यों का निलंबन वापस लिए जाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन की सहमति से वह यह व्यवस्था दे रहे हैं कि अब कोई भी सदस्य आसन के निकट और आसन के सामने तख्तियां लेकर नहीं आएगा।

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इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विपक्ष को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि उसके सदस्य सदन में तख्तियां लेकर नहीं आएंगे और आसन के सामने तख्तियां नहीं लहराएंगे। ओम बिरला ने कहा, ‘पिछले दिनों सदन में हुई घटनाओं ने हम सबको आहत किया है। मुझे भी आहत किया है और देश की जनता को भी पीड़ा पहुंची है।’ उनका कहना था कि संसद देश की सर्वोच्च संस्था है। संवाद और चर्चा से इस सदन की प्रतिष्ठा स्थापित की गई है। पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों ने संवाद और चर्चा के माध्यम इस सदन की प्रतिष्ठा बढ़ाई।

उन्होंने कहा, ‘इस सदन की मर्यादा की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है…चर्चा से ही समसयाओं का समाधान निकलेगा। आजादी के बाद संसद से बड़ी- बड़ी समस्याओं का समाधान निकला…आजादी का अमृतकाल चल रहा है…आपसे आग्रह है कि आप सदन की मर्यादा बनाए रखें। बिरला ने कहा, ‘सभी दलों के नेता बात करें और स्वयं सदस्य भी नियम प्रक्रिया को बनाए रखें…इस सदन में तख्ती लेकर नहीं आना चाहिए। हमें न चाहते हुए कार्रवाई करनी पड़ती है…प्ले कार्ड लेकर आएंगे तो मुझे कार्यवाही करनी पड़ेगी।’

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लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘हम सभी लोग यहां देश के आम लोग आम लोगों की चर्चा के लिए आते हैं। हम जनता के मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान का आर्किषत करने के लिए यहां हैं। आम लोगों की तकलीफों का निवारण करने के लिए जिस हद तक प्रयास होना चाहिए, वह हम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘सदन में किसी तरफ से ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए कि जिससे आपके पद या किसी भी संवैधानिक की गरिमा को ठेस पहुंचे…आपको दुख देने के लिए नहीं आते।’

उन्होंने कहा, ‘सरकार के रवैये के कारण कभी कभी हमें विरोध करना पड़ता है…आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम सदन को चलाने में पूरा सहयोग करेंगे। हमारे सदस्यों का निलंबन वापस लिया जाना चाहिए।’ संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने कहा, ‘हम सदन का कामकाज बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। हमने सत्र के शुरू में ही बोला था कि हम महंगाई पर चर्चा लिए तैयार हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त मंत्री को कोविड हो गया। फिर हमने कहा कि जैसे ही स्वस्थ होंगी हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं।’

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उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि दो सप्ताह तक कामकाज कम क्यों हुआ। विपक्ष आश्वासन दें कि वे तख्तियां लेकर नहीं आएंगे। नियम में स्पष्ट है कि तख्तियां लेकर यहां नहीं आ सकते।’ बिरला ने कहा कि सदन की सहमति है कि सदस्य आसन के निकट यहां तख्तियां लेकर नहीं आएंगे। इसके बाद जोशी ने कांग्रेस के चारों सदस्यों का निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने मंजूरी दी। कांग्रेस सदस्यों का निलंबन वापस लेने के साथ ही सदन में नियम 193 के तहत महंगाई पर चर्चा आरंभ हुई।