English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-08-10 104355

Why Allies Moving Away From BJP:  बिहार में जेडीयू ने एनडीए का साथ छोड़ा, इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और पंजाब में शिरोमणि अकाली दल से भी बीजेपी का गठबंधन छूट चुका है।

 बिहार (Bihar) में नीतीश कुमार (Nitish) के आरजेडी (RJD) से हाथ मिलाने पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को तकरीबन दो साल में तीसरा बड़ा झटका लगा है। इससे पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena) और पंजाब (Punjab) में शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) एनडीए से अलग हो चुके हैं। मंलवार 9 अगस्त को नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस्तीफे के बाद तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने भी इसे लेकर बीजेपी (BJP) पर हमला बोला था। 

तेजस्वी ने कहा था कि बीजेपी जिस पार्टी के साथ रहती है, उसी को समाप्त कर देती है। उन्होंने जेपी नड्डा (JP Nadda) के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि देश में एक ही पार्टी बचेगी और पार्टियां खत्म हो जाएंगी। माना जा रहा है कि नड्डा के इस बयान ने जेडीयू (JDU) को बीजेपी से अलग होने की एक और वजह दे दी। वहीं, क्षेत्रीय दलों का बीजेपी पर एकला चलो की रणनीति पर चलने का आरोप है। शिरोमणी अकाली दल के नेता नरेश गुजराल भी बीजेपी पर क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व खत्म करने का षड़यंत्र रचने का आरोप लगा चुके हैं।

Also read:  उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के लिए सपा ने प्रत्याशियों की लिस्ट की जारी, किन चार चेहरों का जान है तय?

क्या मानते हैं सियासी पंडित

सियासी पंडित मानते हैं कि बिहार के अलावा, पूर्वी राज्यों ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बीजेपी अंतर्विरोधों से जूझ रही है। ओडिशा में लगभग 20 साल से बीजेपी नवीन पटनायक के बीजू जनता दल से आगे नहीं निकल पा रही है। बीजेपी केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जगह बनाने के लिए संघर्षरत है। बिहार के घटनाक्रम से हिंदीपट्टी के इलाकों में असर पड़ सकता है।

कब कौन हुआ एनडीए से अलग

2019 के आखिर में महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में सीएम पद को लेकर शिवसेना और बीजेपी की नहीं बनी और एनडीए को मराठी धरती पर अपना महत्वपूर्ण सहयोगी खोना पड़ा। महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना इस बात पर अड़ गई थी कि वह इसके संस्थापक बाला साहब ठाकरे की इच्छा पूरी करेगी। उसने हवाला दिया कि बाला साहब ठाकरे की इच्छा थी कि एक दिन महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनेगा। उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया और महाविकास अघाड़ी गठबंधन अस्तित्व में आया।

Also read:  PM मोदी ने ग्रेटर नोएडा में किया वर्ल्ड डेयरी समिट का उद्घाटन, बोले- किसानों महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा डेयरी क्षेत्र

2021 में अकाली दल ने तब एनडीए से तब किनारा कर लिया जब सरकार तीन कृषि कानून लाई। सरकार के इस कदम का किसान संगठनों ने व्यापक विरोध किया था और दिल्ली की सीमाओं पर लगभग एक साल आंदोलन चला था। किसानों का आंदोलन पीएम मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के एलान के बाद खत्म हुआ था। अकाली दल बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक थी।

अब 2022 में जेडीयू दूसरी बार एनडीए से अलग हो गई। इससे पहले 2013 में नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर नीतीश कुमार ने एनडीए से गठबंधन खत्म कर लिया था। बीजेपी और जेडीयू का कुल गठबंधन लगभग 17 वर्षों की अवधि का माना जाता है. कुल मिलाकर जेडीयू बीजेपी की पुरानी सहयोगी रही है। बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के साथ ही नीतीश कुमार ने भी बीजेपी पर राज्य में धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप लगा दिया। हालांकि, गठबंधन टूटने के पीछे पार्टियों के अपने-अपने हित कारक रहे।

Also read:  प्रधानमंत्री कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते,

वर्तमान में एनडीए में कितने दल

वर्तमान में एनडीए के साथ 14 राजनीतिक दल हैं. इनमें एआईएडीएमके, एलजेपी, अपना दल (सोनेलाल), नेशनल पीपुल्स पार्टी, नागालैंड की एनडीपीप, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, मिजो नेशनल फ्रंट, नागा पीपुल्स फ्रंट, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन, आरपीआई (अठावले), असम की एजीपी, तमिलनाडु की पीएमके, तमिल मानीला कांग्रेस और असम की यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल शामिल हैं।

कितने राज्यों में बीजेपी के मुख्यमंत्री?

वर्तमान में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर पर में बीजेपी की मुख्यमंत्री हैं। वहीं, पार्टी नागालैंड, मेघालय और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में सरकार में शामिल हैं।

वहीं, केंद्रीय कैबिनेट में एनडीए की अब तीन सहयोगी ही बची हैं। कैबिनेट में एलजेपी, अपना दल और आरपीआई से मंत्री पद हैं। इनमें आरपीआई का प्रतिनिधित्व लोकसभा में नहीं है। एलजेपी वर्तमान में छह सांसदों वाली बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी है।