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हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 12 नवंबर को मतदान और 8 दिसंबर को मतगणना के बाद पहाड़ी प्रदेश में नई सरकार का गठन होना है।

 

हिमाचल पर भाजपा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। उपचुनाव में हालांकि करारी हार के बावजूद भाजपा के हौसले काफी बुलंद हैं। भाजपा पार्टी के सूत्रों का दावा है कि राज्य में उनकी जीत की राह मुश्किल नहीं है। कारण है- केंद्रीय नेतृत्व। जी हां भाजपा आलाकमान पीएम मोदी के चेहरे पर ही हिमाचल प्रदेश की मुश्किल को आसान करने में जुटी है। यही वजह है कि सीएम जयराम ठाकुर भी 68 विधानसभा सीटों वाले छोटे से राज्य में पीएम मोदी के सहारे हैं।

 

भाजपा ने चुनाव आयोग द्वारा विधानसभा चुनाव घोषित होने से बहुत पहले ही हिमाचल प्रदेश में चुनावी मोड अपना लिया था। अगस्त माह में, सौदन सिंह को राज्य का चुनाव प्रभारी और देविंदर राणा को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया था। इस दौरान दोनों ने राज्य के कई दौरे किए और चुनाव खत्म होने तक दोनों के वहीं रहने की संभावना है।

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पीएम मोदी के भरोसे जयराम

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पार्टी विधायकों के खिलाफ सत्ता विरोधी भावनाओं को दूर करने के लिए भाजपा अपनी नेशनल टीम पर अधिक भरोसा जता रही है। चुनाव आयोग के चुनावों की घोषणा से कुछ घंटे पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ‘डबल इंजन सरकार’ की उपलब्धियों को उजागर करने और ऊना से चंडीगढ़ के लिए चौथी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए राज्य में मौजूद थे। एक महीने से भी कम समय में मोदी की हिमाचल प्रदेश की यह दूसरी यात्रा है।

सिरमौर में अमित शाह

शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह सिरमौर जिले में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। शाह इस रैली के जरिए हाटी समुदाय पर फोकस करने वाले हैं, जो लंबे समय से अनुसूचित जनजाति समुदायों की सूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने एक संविधान संशोधन इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

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जेपी नड्डा का गृह राज्य

दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी हिमाचल प्रदेश से आते हैं। पिछले एक साल में उन्होंने भी राज्य में अधिकतम समय दिया है। मार्च के बाद से, नड्डा ने हिमाचल प्रदेश की सात यात्राएं की हैं और राज्य में 15 दिन से अधिक समय बिताया है।

मोदी की टीम में अनुराग ठाकुर

एक साल से अधिक समय पहले हिमाचल प्रदेश के काफी लोकप्रिय चेहरे और केंद्र में अहम पद संभाल चुके अनुराग ठाकुर को भी पीएम मोदी ने कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया था। वे इस वक्त केंद्रीय मंत्रिमंडल में खेल और सूचना और प्रसारण मंत्रालय संभाल रहे हैं। भाजपा को उम्मीद है कि इन प्रयासों से उसे राज्य को बढ़त और सत्ता बनाए रखने में काफी मिलेगी।

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क्या कहता है रिकॉर्ड

इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो पहाड़ी प्रदेश में सत्ताधारियों को वोट देने की प्रवृत्ति रही है। पार्टी को उत्तराखंड में भी सत्ता लगातार दूसरी बार मिली। पिछले विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो 2017 में भाजपा ने 68 में से 44 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस के खाते में 21 सीटें आईं। कांग्रेस के दो विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि, पिछले साल तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी नेताओं को लगता है कि विधानसभा चुनाव उपचुनावों से अलग होंगे। पार्टी कम से कम एक दर्जन सिटिंग विधायकों को टिकट देने से भी इनकार कर सकती है।