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पुलिस ने ट्विटर हैंडल का आर्काइव डाटा खंगाला और एक कंप्लीट बैक्ट्रेक एनालिसिस किया। इसके बाद पुलिस सुल्ली डील एप बनाने के आरोपी ओमकारेश्वर ठाकुर तक पहुंच गई।

 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक बुल्ली बाई एप मामले के आरोपी नीरज बिश्नोई से पूछताछ में पता चला कि वह अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वर्चुअल आईडेंटिटी से चैट करता था। इसके साथ ही ग्रुप डिस्कशन में भी शामिल हुआ करता था। जुलाई 2021 में ट्विटर पर एक ग्रुप, जिसमें नीरज बिश्नोई भी मेंबर था, उसमें ग्रुप के दूसरे मेंबर्स ने सुल्ली डील एप की जानकारी साझा की। पुलिस के मुताबिक यूनिट ने जांच पाया कि उस समय एक्टिव इन ग्रुप्स के कई ट्विटर हैंडल डीएक्टिवेट कर दिए गए हैं। पूछताछ में नीरज बिश्नोई ने ये भी बताया कि यह ट्विटर हैंडल इंदौर में रहने वाले एक शख्स के थे। जिसके बाद पुलिस ने इस ट्विटर हैंडल का आर्काइव डाटा खंगाला और एक कंप्लीट बैक्ट्रेक एनालिसिस किया।  इसके बाद पुलिस सुल्ली डील एप बनाने के आरोपी ओमकारेश्वर ठाकुर तक पहुंच गई है।

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ग्रुप का मेंबर है सुल्ली डील एप का आरोपी

पूछताछ में आरोपी ओमकारेश्वर ठाकुर ने बताया कि वह ट्विटर पर ट्रेड ग्रुप का मेंबर है और इस ग्रुप के अंदर ही इस तरह के एप को बनाकर मुस्लिम महिलाओं को ट्रोल करने का आइडिया आपस में शेयर किया गया था। आरोपी ने GITHUB पर सुल्ली डील एप तैयार किया। साथ ही इसका कोड सभी ग्रुप मेंबर से शेयर किया। इसके बाद सुल्ली डील एप पर सभी ग्रुप मेंबर्स ने मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें अपलोड कीं, जिन्हें नीलामी के लिए तैयार बताया गया।

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आरोपी ने डिलीट कर दिए थे सोशल मीडिया एकाउंट

पुलिस के मुताबिक आरोपी ने ट्विटर पर ट्रेड ग्रुप जनवरी 2020 में जॉइन किया था।  इस ग्रुप में आरोपी ट्रेड महासभा नाम के अपने टि्वटर अकाउंट से ग्रुप में जुड़ा था। ग्रुप डिस्कशन के दौरान सभी ने एक एप बनाकर मुस्लिम महिलाओं को कॉल करने के बारे में तय किया। जिसके बाद आरोपी ओमकारेश्वर ने GITHUB पर कोड/एप बनाया, जिसे सुल्ली डील नाम दिया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने सुल्ली डील ट्रोल होने के बाद अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिये थे।