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 हिन्द महासागर क्षेत्र में चार माह तक चला भारतीय नौसेना का प्रमुख ऑपरेशनल अभ्यास ‘ट्रॉपेक्स’ इस सप्ताह अरब सागर में सम्पन्न हो गया। समग्र अभ्यास में तटीय रक्षा अभ्यास सी-विजिल और जमीन व जल में अभ्यास एम्फेक्स शामिल थे। इन अभ्यासों में भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और तटरक्षक बल की महत्वपूर्ण भागीदारी भी रही। यह सैन्याभ्यास पिछले साल नवंबर में चार महीने की अवधि के लिए आईओआर में शुरू हुआ था।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी सहित हिंद महासागर में इस अभ्यास के लिए संचालन का क्षेत्र उत्तर से दक्षिण तक 4300 समुद्री मील तक और पश्चिम में फारस की खाड़ी से 35 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पूर्व में उत्तरी ऑस्ट्रेलिया तट तक लगभग 5000 समुद्री मील में फैला हुआ था। यह पूरा इलाका 21 मिलियन वर्ग समुद्री मील से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ था। ट्रॉपेक्स-23 में भारतीय नौसेना के लगभग 70 जहाजों, छह पनडुब्बियों और 75 से अधिक विमानों ने भाग लिया।

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ट्रॉपेक्स 23 के अंतिम पड़ाव में भारतीय नौसेना का प्रमुख ऑपरेशनल अभ्यास हुआ। नवंबर, 2022 में शुरू हुए अभ्यास के अंतिम संयुक्त चरण के हिस्से के रूप में रक्षा मंत्री ने छह मार्च को स्वदेशी विमान वाहक विक्रांत पर समुद्र में एक दिन बिताया। उन्होंने भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों और साजो-सामान की समीक्षा की, जिसमें नौसेना ने स्वदेशी एलसीए के डेक संचालन और प्रत्यक्ष हथियार फायरिंग सहित परिचालन कौशल और लड़ाकू अभियानों के विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन किया।

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बेड़े को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि देश को नौसेना पर पूरा भरोसा है कि वह दुश्मनों की आर्थिक जीवन-रेखा और सैन्य क्षमताएं बाधित करके उसकी युद्ध क्षमता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय नौसेना समुद्री क्षेत्र में भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है और भारत के शांतिपूर्ण अस्तित्व को खतरे में डालने वाले किसी भी संभावित दुश्मन के गलत इरादों को विफल कर देगी। रक्षा मंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल में सबसे आगे रहने और युद्ध तत्परता, विश्वसनीयता, सामंजस्यपूर्ण और सुरक्षित भविष्य की दिशा में भारतीय नौसेना की भूमिका को सराहा।