English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-05-22 173854

असम के नगांव में अधिकारियों ने रविवार को कई परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि ये कथित तौर पर जिले के एक पुलिस स्टेशन में आग लगाने में शामिल थे।

एक स्थानीय निवासी सफीकुल इस्लाम की हिरासत में मौत के एक कथित मामले के बाद सलोनाबोरी गांव के लगभग 40 लोगों की भीड़ ने शनिवार दोपहर ढिंग क्षेत्र में बटाद्रवा पुलिस स्टेशन के एक हिस्से में आग लगा दी थी।

नगांव जिला प्रशासन ने शनिवार को मौत की न्यायिक जांच के आदेश दिए और पुलिस ने बटाद्रवा स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को निलंबित कर दिया।

 

Also read:  पेगासस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को 20 जून तक रिपोर्ट जमा करने को कहा

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रविवार की सुबह बुलडोजर थाने से करीब छह किलोमीटर दूर गांव पहुंचे और उन लोगों के घरों को ध्वस्त कर दिया जो पुलिस थाने में आग लगाने में शामिल थे।

 

असम के विशेष डीजीपी (कानून और व्यवस्था) जी पी सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि भीड़ में 40 लोग थे। हमने सात की पहचान की है और गिरफ्तार किया है, 15 को हिरासत में लिया गया है। हम हिरासत में मौत से जुड़े कथित मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। मामले में एसआईटी बनेगी। लेकिन इस तरह के आरोप का मतलब यह नहीं है कि आप पुलिस थाने में आग लगा दें। आगजनी की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है।

Also read:  फॉर्म में लौटे चेतेश्वर पुजारा, मार्च में श्रीलंका के खिलाफ होगी टेस्ट सीरीज

पुलिस की कार्रवाई के बाद बारपेटा के कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया कि हम पुलिस थाने पर हमले का कभी समर्थन नहीं करते। लेकिन पुलिस द्वारा हमलावरों के घरों पर बुलडोजर चलाना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

ये है मामला

DGP भास्कर ज्योति महंत ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर विस्तार से बताया कि 39 वर्षीय सफीकुल इस्लाम को शराब के नशे में होने की शिकायत मिलने के बाद 20 मई को रात 9.30 बजे पुलिस थाने लाया गया था। वह वास्तव में थाने लाए जाने से पहले एक सड़क पर पड़ा हुआ था। चिकित्सकीय जांच के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अगले दिन उसे रिहा कर दिया गया और उसकी पत्नी को सौंप दिया गया। उसकी पत्नी ने उसे कुछ पानी/भोजन भी दिया। बाद में उसने तबीयत बिगड़ने की शिकायत की और इसके बाद उसे एक के बाद एक दो अस्पतालों में ले जाया गया। दुर्भाग्य से, उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद भीड़ ने यह आरोप लगाते हुए शनिवार दोपहर को थाने और कई दोपहिया वाहनों में आग लगा दी कि मछली व्यापारी की मौत पुलिस की प्रताड़ना के कारण हुई।

Also read:  बीजेपी नेता गुलाब चंद कटारिया का विविदित बयान, कहा-रावण ने सीता का हरण कर कुछ गलत नहीं किया