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चक्का जाम के बाद आगे की रणनीति बनाने के लिए किसान संगठनों की आज सोनीपत में बैठक होगी जिसमें सरकार पर दबाव बनाने और आंदोलन को तेज करने की रणनीति बनाई जाएगी। साथ ही पूरे देश में एक साथ आंदोलन खड़ा करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इधर, रविवार को बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर दो और ढांसा बॉर्डर एक किसान की मौत हो गई। टीकरी बॉर्डर पर एक किसान ने आत्महत्या कर ली।

बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर के निकट जींद के किसान ने पार्क में पेड़ से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। बॉर्डर एरिया में ही पंजाब के दो किसानों की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इनमें एक किसान पंजाब के मोगा जिले तो दूसरा किसान संगरूर का निवासी था। उधर, ढांसा बॉर्डर पर झज्जर जिले के गांव गुढ़ा के किसान की हृदयाघात से मौत हो गई।

रेवाड़ी के खेड़ा बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन को समर्थन देने राजस्थान से कई जिलों के किसान पहुंचे। झज्जर में राज्य सभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उन्होंने किसानों की आवाज राज्यसभा में उठाई है। ढांसा व टीकरी बॉर्डर पर किसान व खापों के प्रतिनिधि पहुंचे। जींद में खटकड़ व बद्दोवाल टोल प्लाजा पर धरना जारी है। जुलाना से महिलाओं ने दिल्ली के लिए कूच किया। सीटू कार्यकर्ताओं ने उचाना में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के कार्यालय का घेराव किया।

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चक्काजाम ने किसान आंदोलन में एक नई जान डाल दी है। जहां पहले हरियाणा के किसान दिन-रात शंभू बॉर्डर पर डटे हैं। वहीं, अब पंजाब के किसान भी सहयोग देने के लिए बॉर्डर पर पहुंचने लगे हैं। रविवार को शंभू बॉर्डर पर किसानों की संख्या भी एकाएक बढ़ गई है। पदाधिकारियों की मानें तो पंजाब से लगभग 300 किसान पहुंच गए हैं। वहीं, हरियाणा के लगभग 500 किसान प्रतिदिन की तरह पहुंचे। कुरूक्षेत्र में चक्काजाम के बाद फिर से टोल प्लाजा पर किसान जुटे। अब 9 फरवरी को गुमथलागढू की अनाज मंडी में होने वाली किसान नेता टिकैत की रैली के लिए किसान गांव-गांव जाकर लोगों को न्योता देने में लगे हैं

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जलालाबाद (फिरोजपुर) के गांव चक जंड वाला की ग्राम पंचायत ने एक प्रस्ताव पारित कर फैसला लिया है कि गांव के प्रत्येक घर से एक व्यक्ति दिल्ली धरने में जाएगा। दिल्ली नहीं जाने वाले को 2100 रुपये का जुर्माना देना होगा। जो पंचायत के फैसले को नहीं मानेगा, उसके खिलाफ पंचायत सख्त कार्रवाई करेगी। सरपंच सोहन सिंह जोसन के मुताबिक किसानों के आंदोलन को मजबूत करना है।

26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान गिरफ्तार हुए किसानों की रिहाई की मांग पंजाब में उठने लगी है। गिरफ्तार हुए किसानों के परिजन इस मामले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। तरनतारन जिले के रहने वाले एक किसान तिहाड़ जेल में बताया जा रहा है। परिजनों के पास किसान को छुड़ाने के लिए पैसे नहीं है। पत्नी ने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। वहीं किसानों के समर्थन में रविवार को भी पंजाब में कई स्थानों पर सद्भावना मार्च निकालकर गिरफ्तार किसानों की रिहाई की मांग कीं गई। जालंधर में दिल्ली में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में विभिन्न समुदाय के लोगों ने सद्भावना मार्च निकाला। सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) की बैठक में केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। साथ ही कहा कि दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए युवाओं को रिहा किया जाए।