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लेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि हेट स्पीच को लेकर स्पष्ट कानून नहीं है। आयोग ने कहा कि मौजूदा कानून समुचित नहीं है। बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था।

 

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सामने असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि अगर कोई पार्टी या उसके सदस्य अभद्र भाषा में लिप्त होते हैं तो उसके बाद किसी राजनीतिक दल की मान्यता वापस लेने या उसके सदस्यों को अयोग्य घोषित करने का कानूनी अधिकार नहीं है।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा हेट स्पीच को लेकर स्पष्ट कानून नहीं और मौजूदा कानून कारगर नहीं है। चुनाव के दौरान हेट स्पीच और अफवाहों को रोकने के लिए आयोग भारतीय दंड संहिता और जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 के तहत राजनीतिक दलों समेत अन्य लोगों को सौहार्द बिगाड़ने से रोकने को लेकर काम करता है लेकिन हेट स्पीच और अफवाहों को रोकने के लिए निर्धारित कानून नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट से आयोग की गुहार

आयोग ने अपील करते हुए कहा कि सर्वोच्च अदालत को इस मामले में समुचित आदेश देना चाहिए, क्योंकि विधि आयोग ने 267वीं रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है की आपराधिक कानून में हेट स्पीच को लेकर जरूरी संशोधन किए जाने चाहिए। चुनाव के दौरान हेट स्पीच का मामला कई बार सामने आता है मगर कानूनी दांव-पेंचों से ये नेता आसानी से बचकर निकल जाते हैं। अभद्र भाषा पर अंकुश लगाने के उपायों की मांग करने वाली एक जनहित याचिका के जवाब में दायर जवाबी हलफनामे में आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी भिलाई संगठन बनाम भारत संघ (2014) के मामले में भारत के विधि आयोग को यह प्रश्न भेजा था।

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प्रश्न में पूछा था कि यदि कोई पार्टी या उसके सदस्य अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो चुनाव आयोग को उसे या उसके सदस्यों को अयोग्य घोषित करने, राजनीतिक दल की मान्यता रद्द करने की शक्ति प्रदान की जानी चाहिए। आयोग ने बताया कि भारत के विधि आयोग की 267वीं रिपोर्ट में अदालत के इस सवाल का जवाब दिया नहीं दिया गया। इसके अलावा आयोग ने ये भी स्पष्ट रूप से अभद्र भाषा के खतरे को रोकने के लिए भारत के चुनाव आयोग को मजबूत करने के लिए संसद को कोई सिफारिश की। हालांकि विधि आयोग ने सुझाव दिया कि भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में कुछ संशोधन किए जाएं।

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सिर्फ आईपीसी के तहत कर सकते हैं कार्रवाई

चुनाव आयोग ने कहा कि फिलहाल सिर्फ आईपीसी या जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत ही उम्मीदवारों पर ऐसी स्थिति में कार्रवाई की जाती है लेकिन उसमें आयोग के पास किसी भी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोकने का अधिकार नहीं दिया गया है। चुनाव के दौरान हेट स्पीच को लेकर भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दाखिल किया है ।याचिका में नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाह फैलाने वाले बयान पोस्ट या कोशिश को अपराध बताने और इसके लिए सजा तय करने पर कानून बनाए जाने की गुहार लगाई गई है।