English മലയാളം

Blog

Screenshot 2023-04-17 143320

चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से SC के दो जजों ने दूरी बना ली है। जस्टिस जोसफ और नागरत्ना की बेंच ने खुद को इस सुनवाई से अलग कर लिया है। अब किसी और बेंच में मामला लगाया जाएगा।

जस्टिस जोसेफ और बी वी नागरत्ना की पीठ ने मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। पीठ के सुनवाई से खुद को अलग करने से पहले गोयल की नियुक्ति को चुनौती देने वाले एनजीओ ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ से सवाल किया और यह दिखाने को कहा कि किन नियमों का उल्लंघन किया गया।

ये है वजह

बता दें कि यह दोनों जज उस बेंच का हिस्सा थे जिसने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति PM, नेता विपक्ष और CJI की कमिटी के जरिए किए जाने का आदेश दिया था।

Also read:  पति ने पत्नी के शादी करवाई प्रेमी से, खुद बनाया वीडियो

सुप्रीम पीठ ने उठाए थे ये सवाल

सुनवाई से अलग होते हुए पीठ ने कहा कि संवैधानिक पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति के बाद यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि वह गलत, मनमाना काम करेगा या हां में हां मिलाएगा।

Also read:  महिला अध्यापक से रेप करने के बाद बनाया वीडियो, पुलिस ने आरोपी युवक को किया गिरफ्तार

पीठ ने कहा कि याचिका शीर्ष अदालत के दो मार्च के उस फैसले पर निर्भर है जिसमें कहा गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा के विपक्ष के नेता और सीजेआई शामिल है।

लंबे फैसले में, पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि नौकरशाह गोयल ने पिछले साल 18 नवंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कैसे किया, जब उन्हें चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव के बारे में पता नहीं था।

Also read:  सऊदी अरब अगले अरब शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा: FM

प्रशांत भूषण ने उठाया मुद्दा

सुनवाई के दौरान एनजीओ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि गोयल की नियुक्ति प्रक्रिया दुर्भावनापूर्ण और मनमानी थी और देश भर में 160 अधिकारियों के पूल में से चार अधिकारियों का चयन किया गया था और उनमें से कई गोयल से छोटे थे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।