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द कश्मीर फाइल्स मूवी देख कर निकलने के बाद सीएम बघेल ने कहा कि हमने कश्मीर फाइल पूरी देखी। 

 

द कश्मीर फाइल्स को देखने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कश्मीर में जो आतंकवादी घटनाएं हुई। उस पर बनाई गई फिल्म है। जिसमें एक परिवार की घटना है। जिसे लेकर पिक्चर आगे बढ़ा है पिक्चर आगे बढ़ा है। कश्मीरी पंडितों को रोकने का प्रयास नहीं किया गया बल्कि कश्मीरी पंडितों को जाने के लिए कहा गया। सेना तब भेजी गई जब पूर्व प्रधानमंत्री लोकसभा का घेराव करते हैं।

आज भी कश्मीर पंडितों की समस्या वही है। 370 हटा दिए गए लेकिन ना उसको बसाने का काम हो रहा है ना अटल जी की सरकार में ना अभी जब मोदी जी की सरकार में। 370 को हटाए काफी दिन हो गए लेकिन किसी को बताने का प्रयास नहीं किया गया। इस पिक्चर में उसका कोई समाधान नहीं। जो पिक्चर बनाया जाता है तो समस्याओं को उठाया जाता है समाधान भी बताया जाता है। डायरेक्टर ने फिल्म के माध्यम से मात्र एक लेक्चर दिया है। सरकार ने भी 370 हटाके राजनीति की है।

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370 जब हटा तो बोला गया था कि कश्मीर में जमीन लेंगे। वहां हरियाणा के मंत्री जी ने कुछ और बयान दिया था। जिसके बारे में मैं कहना नहीं चाहता। कश्मीर पंडितों को जो सहायता दी जानी चाहिए उसमें कोई भी वृद्धि अभी तक नहीं की गई। निश्चित रूप से इस पिक्चर में हिंसा दिखाई गई है। बच्चों के मन में इस पिक्चर का अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा। जब हम लोगों ने यह पिक्चर देखी तो दिमाग बोझिल हो गया।

भारतीय जनता पार्टी के लोग बोले कि यहां यह पिक्चर टैक्स फ्री किया जाना चाहिए। डायरेक्टर ने मुझसे भी अपील की कि अपने राज्य में टैक्स फ्री करिए। जब प्रधानमंत्री से वे मिले तो पूरे देश भर में टैक्स फ्री करने की मांग क्यों नहीं की।

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पिक्चर में आधा सच दिखाया गया है. पूरी बात नहीं बताई गई. पिक्चर में जो किरदार है। कृष्णा का उसके भाषण में सारी बातें कह दी जाती है। जो भी भारत के प्रति सद्भावना रखते हैं वह अपने आप को भारतीय समझते हैं। चाहे वह हिंदू हो मुस्लिम हो सिख हो इसाई हो सब की हत्या की गई है।

मंदिर भी तोड़े गए। मस्जिद भी तोड़े गए। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। धर्म की आड़ में हिंसा व राजनीति की जाती है। अगर इस पिक्चर के माध्यम से 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो तो बहुत गलत कर रहे हैं। बहुत गलत दिशा में देश को ले जाने वाली बात है। कश्मीरी पंडितों की समस्याओं का समाधान ढूंढा जाना चाहिए। उसे वापस बसाने के लिए काम किए जाने चाहिए। जिसे भारत सरकार ने कुछ नहीं किया।

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सेंसर बोर्ड का आजकल कोई महत्व नहीं रहा. किस पिक्चर का दिखाना है वह किसे नहीं के बारे में कमेंट करने का कोई औचित्य अब नहीं रहा। इस पिक्चर में जिस प्रकार का संदेश देने का प्रयास किया गया है उसमें सफल नहीं होंगे। जो घटना घटी है, बिल्कुल मैं उसकी निंदा करता हूं। आतंकवाद का कभी कोई समर्थन हो नहीं सकता। एक तरफा चीजों को दिखाया जाना अनुचित है।

बीजेपी के ही शासनकाल व समर्थन में यह सारी चीजें हुई है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सामना करना नहीं जानते। जिस तरीके का माहौल बनाया गया इसलिए हमने यह पिक्चर देखी और देखने के बाद ही हम यह सारी बातें कह रहे हैं। ऐसा पिक्चर जिसमें कोई समाधान ना हो कोई संदेश देने का प्रयत्न किया गया हो इसमें केवल हिंसा दिखाने का प्रयास किया गया हो। मैं नहीं समझता कि इसका कोई औचित्य है।