English മലയാളം

Blog

Screenshot 2022-02-24 075453

रूस-यूक्रेन के बीच टकराव से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और तरलीकृत गैस (LNG) की कीमतें बढ़ सकती हैं। मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने बुधवार को यह कहा।

 

उसने कहा कि इसका ऊर्जा आयातक देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हाल के दिनों में यूक्रेन और रूस के बीच तनाव बढ़ा है। रूस ने सोमवार को पूर्वी यूक्रेन के अलगावादियों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता दे दी और वहां रूसी सेना तैनात कर दी। यूक्रेन पर हमले की आशंका तथा रूस पर पश्चिमी देशों की पाबंदियों से वैश्विक कच्चा तेल मानक ब्रेंट क्रूड मंगलवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। रूस प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है।

Also read:  कोरोना मूल वायरस के मुकाबले 318% तेजी से फैल रहा ओमिक्रन, देश में तीसरी लहर की आहट

मूडीज इनवेस्टर सर्विस के प्रबंध निदेशक माइकल टेलर ने कहा, आयात की स्थिति में बदलाव से व्यापार पर असर दिख सकता है। हालांकि, मध्य एशिया में जिंस उत्पादक देशों के पास चीन को आपूर्ति बढ़ाने का विकल्प हो सकता है। टेलर ने कहा, दोनों देशों के बीच संघर्ष की स्थिति में वैश्विक स्तर पर तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुछ निर्यातकों के लिये सकारात्मक होगा।

Also read:  Russia Ukraine Crisis: कीव और खार्किव में दो धमाके, रूस-यूक्रेन जंग में अगले 24 घंटे अहम

जबकि काफी संख्या में शुद्ध रूप से ऊर्जा आयातकों पर इसका असर नकारात्मक होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का एलएनजी के लिए दीर्घकालीन आपूर्ति अनुबंध है। इससे हाजिर मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत जबकि प्राकृतिक गैस की आवश्यकताओं का आधा हिस्सा आयात करता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी पहुंच सकता है और ऐसी स्थिति में यह पेट्रोल पंपों पर लोगों की जेब को चोट पहुंचाएगा। दुनिया भर में खपत होने वाले हर 10 बैरल तेल में से एक बैरल तेल रूस का होता है।

Also read:  सीएम योगी ने भाजपा नेतृत्व के साथ की यूपी मंत्री मंडल पर चर्चा, चर्चा में पीएम मोदी, जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह शामिल