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गायिका संध्या मुखर्जी और तबला वादक अनिंद्य चटर्जी ने भी पद्म पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है अतीत में कई हस्तियां पद्म पुरस्कार लेने से मना कर चुकी हैं कई शख्सियतों ने विरोध में भी इस सम्मान को लौटा चुकी हैं।

बुजुर्ग वामपंथी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार की ओर से घोषित पद्मभूषण सम्मान लेने से इनकार कर दिया।

इसके साथ ही गुजरे जमाने की पार्श्व गायिका संध्या मुखर्जी और तबला वादक अनिंद्य चटर्जी ने भी पद्मश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है।

सरकार ने 128 पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाने को मंजूरी दी है जिसमें 4 हस्तियों को पद्म विभूषण और 17 लोगों को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे बुद्धदेव भट्टाचार्य ने इस बाबत बयान जारी कर कहा, “पद्मभूषण पुरस्कार के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे किसी ने इस बारे में पहले नहीं बताया है। अगर मुझे पद्मभूषण पुरस्कार देने का एलान किया गया है तो मैं इसे लेने से इनकार करता हूं।”

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वहीं गायिका संध्या मुखोपाध्याय की बेटी सौमी सेनगुप्ता ने इंडिया टुडे से बातचीत में मां के पद्म श्री पुरस्कार ठुकारए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि 90 साल की उम्र के बाद उनके जैसी दिग्गज को पद्मश्री प्रदान करना बेहद अपमानजनक बात है। तबला वादक अनिंद्य चटर्जी ने भी कहा कि अब इस उम्र (67) में पद्मश्री मिलना सम्मानजनक नहीं है। मुझे बहुत पहले ही यह पुरस्कार मिलना चाहिए था।

हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब किसी हस्ती ने पद्म सम्मान लेने से इनकार किया है। इससे पहले भी कई जानी-मानी हस्तियां इस सम्मान को लेने से इनकार कर चुकी हैं। खासकर वामपंथी नेता ऐसे सम्मान को ठुकराते रहे हैं। बुद्धदेव के बाद सीपीएम ने बयान जारी कर कहा कि सीपीएम शुरू से ही ऐसे पुरस्कार ठुकराती रही है। हमारा काम आम लोगों के लिए है, अवॉर्ड के लिए नहीं। इससे पहले ईएमएस नंबूदरीपाद ने भी अवॉर्ड लेने से इनकार कर दिया था।

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नंबूदरीपाद को 1992 में पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पद्म विभूषण पुरस्कार के लिए चुना गया था। नंबूदरीपाद के साथ ही दो अन्य नौकरशाह पीएन हक्सर और स्वामी रंगनाथनंद ने पद्म भूषण सम्मान को खारिज कर दिया था।

साल 2013 में गायिका सिस्तला जानकी ने पद्मभूषण सम्मान को लेने से मना कर दिया था। वहीं आपातकाल के दौरान जेल में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र कपूर ने 2016 में पद्म सम्मान लेने से इनकार कर दिया था। इसी साल तमिल लेखक एवं निर्देशक बी. जयमोहन ने भी इसको लेने से मना कर दिया था। ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की बहन गीता मेहता ने 2019 में पद्म श्री सम्मान लेने से इनकार कर चुकी हैं

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी किसानों के विरोध के समर्थन में 2020 में पद्म विभूषण लौटा दिया था। वहीं राजनेता लक्ष्मी चंद जैन के परिवार ने मरणोपरांत सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह राजकीय सम्मान स्वीकार करने के खिलाफ थे। इतिहासकार रोमिला थापर ने दो बार पद्म पुरस्कार लेने से मना कर चुकी हैं, जबकि सिविल सेवक के सुब्रह्मण्यम ने भी पुरस्कार से इनकार कर दिया था। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा के परिवार ने भी पद्म भूषण को ठुकरा दिया था।

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ये हस्तियां लौटा चुकी हैं पद्म पुरस्कार

कुछ हस्तियों ने पद्म पुरस्कार को विरोध में भी लौटा चुकी हैं। कन्नड़ साहित्यकार के शिवराम कारंत ने 1975 में घोषित आपातकाल के विरोध में अपना 1968 का पद्म भूषण लौटा दिया। वहीं खुशवंत सिंह ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में पद्म भूषण वापस कर दिया था। बॉलीवुड पटकथा लेखक सलीम खान और लेखक गीता मेहता सहित लगभग 18 लोगों ने पद्म श्री को अस्वीकार कर दिया था, जबकि दस ने पुरस्कार लौटा दिए। पद्म पुरस्कार लौटाने वालों में मशहूर शायर कैफी आजमी और जयंत महापात्रा का नाम भी शामिल हैं।