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जजों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव देने वाले कॉलेजियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच टकराहट कम होने का नाम नहीं ले रही है।

 

अब केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को लेटर लिखकर कॉलेजियम में सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करने को कहा है। कानून मंत्री ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों को कॉलेजियम में शामिल किए जाने से जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता आएगी और सार्वजनिक जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

विपक्षी दलों ने कानून मंत्री की मांग को बताया खतरनाक

उधर, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को कॉलेजियम में सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग पर विपक्षी दलों ने ऐतराज जताया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह बेहद खतरनाक मांग है। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, “यह बेहद खतरनाक है। न्यायिक नियुक्तियों में बिल्कुल भी सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।” केवल आप नेता अरविंद केजरीवाल ही नहीं कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस आदि दलों ने भी कॉलेजियम का समर्थन करते हुए सरकारी हस्तक्षेप को खतरनाक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का समर्थन किया है।

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रिजिजू के समर्थन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़…

जजों की नियुक्तियों को लेकर जुबानी जंग में किरेन रिजिजू सहित कई बीजेपी मंत्रियों का समर्थन देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी किया है। उन्होंने ज्यूडिशियरी की अस्पष्टता पर आलोचना की है। तर्क दिया कि कि न्यायाधीशों के चयन में सरकार की भूमिका होनी चाहिए जो कि 1993 से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का कार्यक्षेत्र रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को रद्द करना देश के संविधान और संसद का अपमान है। यह दुनिया में कहीं भी नहीं देखा गया जो सुप्रीम कोर्ट ने किया है।

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कॉलेजियम को इसलिए नहीं खत्म किया जा सकता…

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कॉलेजियम सबसे निष्पक्ष है। कॉलेजियम सिस्टम जमीन का कानून है जिसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। यह कानून सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि समाज के कुछ वर्गों ने कॉलेजियम प्रणाली के खिलाफ विचार व्यक्त किया। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल, केएम जोसेफ, एमआर शाह, अजय रस्तोगी और संजीव खन्ना शामिल हैं।

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