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मध्यप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते बीजेपी ने तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं, इसी कड़ी में प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत को RSS में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में 2023 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिहाज से बीजेपी के संगठन में फेरबदल अभी से शुरू हो गया है। बीजेपी (BJP) के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत (Suhas Bhagat) की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में वापसी हुई है। उन्हें संघ के बौद्धिक वर्ग में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है और वह जबलपुर (Jabalpur) में रहकर कामकाज देखेंगे। वहीं हितानंद शर्मा (Hitanand Sharma) फिलहाल संगठन मंत्री का काम देखेंगे। बीजेपी में संगठन महामंत्री का पद सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

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संघ की पिछले दिनों हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सुहास भगत को मध्य क्षेत्र (मप्र-छग) का बौद्धिक प्रमुख नियुक्त किया गया है। उनका मुख्यालय जबलपुर नियत किया गया है। उनके स्थान पर प्रदेश सह संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को प्रदेश संगठन महामंत्री बनाए जाने की बात चल रही है, फिलहाल अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। फिलहाल सुहास भगत के संघ में वापस जाने से संगठन मंत्री की जिम्मेदारी हितानंद शर्मा ही संभालेंगे।

साल 2016 में सुहास भगत को संघ से बीजेपी में भेजा गया था। उस समय संगठन और सत्ता में समन्वय को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को महसूस करते हुए, यह निर्णय लिया गया था। कहा जाता है कि, भगत ने प्रदेश बीजेपी में नई पीढ़ी वाली पार्टी को तैयार किया। उनके कार्यकाल में मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जहां पर सभी मण्डल अध्यक्ष 40 वर्ष से कम आयु के हैं।

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सुहास भगत ने इन जगहों पर बीजेपी के लिए निबाही है महत्वपूर्ण भूमिका

उन्होंने सभी महानगरों में युवाओं को जि़ला अध्यक्ष नियुक्त करने में बड़ी भूमिका निभाई है। संगठन के साथ उनके तालमेल की बदौलत संगठनात्मक नियुक्तियों में विधायकों के एकाधिकार को समाप्त किया गया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की 2020 में समर्थक विधायकों के साथ बीजेपी में एंट्री के बाद पार्टी के अलग-अलग धड़ों के साथ समन्वय स्थापित करने में भी सुहास भगत की बड़ी भूमिका रही।

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मध्यप्रदेश के संगठन को डिजिटिलाइज बनाने के लिए हुए फैसले के अंतर्गत बूथ विस्तार करने और बूथों को डिजिटाइज करने में भी भगत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भगत अपने पूरे कार्यकाल में निर्विवादित होकर सबको साथ लेकर काम करते रहे और उपचुनाव के दौरान छोटी-छोटी टोलियों के माध्यम से बीजेपी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने का काम उन्होंने बखूबी निभाया है, जो पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण साबित हुई है।